पोहे की थाली में विकास के दावे, शहर अब हिसाब भी मांगेगा! - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

Breaking

Sunday, June 7, 2026

पोहे की थाली में विकास के दावे, शहर अब हिसाब भी मांगेगा!

 


जबलपुर/राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी सुनाई दी कि क्या सत्ता पक्ष को अपनी ही पार्टी की नेत्री की मौत पर अधिक संवेदनशीलता और गंभीरता नहीं दिखानी चाहिए थी? नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठता रहा कि जब एक परिवार न्याय और जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है, तब उत्सवधर्मिता का यह प्रदर्शन क्या उचित संदेश देता है?

विकास की तस्वीरें बड़ी, लेकिन जवाबदेही का फ्रेम क्यों छोटा?

प्रदर्शनी में विकास कार्यों के सैकड़ों चित्र प्रदर्शित किए गए, लेकिन कहीं भी उन परियोजनाओं की लागत, समयसीमा, गुणवत्ता परीक्षण, रखरखाव और स्वतंत्र ऑडिट की जानकारी दिखाई नहीं दी। जानकारों का कहना है कि लोकतंत्र में विकास केवल उपलब्धियों की तस्वीरें लगाने से सिद्ध नहीं होता, बल्कि यह भी बताना पड़ता है कि परियोजना पर कितना खर्च हुआ, उसका लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।

यही कारण है कि अब नागरिकों के बीच एक नया सवाल उभर रहा है—क्या नगर निगम विकास का सामाजिक लेखा-जोखा भी सार्वजनिक करेगा या केवल उसकी रंगीन तस्वीरें ही जनता को दिखाई जाती रहेंगी?

विश्व पोहा दिवस के रंगारंग आयोजन के बीच शहर एक अन्य गंभीर घटना से भी स्तब्ध था। भाजपा नेत्री संगीता रजक की गोली लगने से हुई मौत पूरे जबलपुर में चर्चा और संवेदना का विषय बनी हुई थी। एक ओर पार्टी की महिला नेत्री की असामयिक मृत्यु को लेकर सवाल और शोक का माहौल था, वहीं दूसरी ओर शहर के कई भाजपा नेता, जनप्रतिनिधि और महापौर पोहा दिवस के मंच पर उत्सव, सम्मान और फोटो सेशन में व्यस्त दिखाई दिए।

वयोवृद्ध नागरिक की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

आयोजन स्थल के सामने से गुजर रहे एक वरिष्ठ नागरिक ने प्रदर्शनी को देखकर व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा—

"अगर इस कार्यक्रम का नाम 'विश्व पोहा दिवस' के बजाय 'सोअहा महोत्सव' रखा जाता तो शायद भारतीय संस्कृति और लोक परंपरा की झलक भी दिखाई देती।"

हालांकि यह उनका व्यक्तिगत विचार था, लेकिन आयोजन के दौरान यह टिप्पणी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। कई लोग इसे आधुनिक आयोजनों और भारतीय सांस्कृतिक प्रतीकों के बीच बढ़ती दूरी के रूप में भी देख रहे हैं।

No comments:

Post a Comment