जबलपुर स्थित सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल में शुरू की गई ‘जेल कैंटीन’ इन दिनों शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बाजार में जहां समोसे और आलूबंडों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और गुणवत्ता को लेकर भी लोग सवाल उठाते हैं, वहीं सेंट्रल जेल परिसर में संचालित यह कैंटीन मात्र ₹10 में स्वादिष्ट और भरपूर आकार के समोसे उपलब्ध करा रही है। खास बात यह है कि इस कैंटीन का संचालन खुली जेल में सजा काट रहे बंदियों द्वारा किया जा रहा है, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
कम कीमत में बेहतरीन स्वाद बना पहचान
जेल कैंटीन के समोसे अपनी गुणवत्ता और स्वाद के कारण तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। यहां आने वाले ग्राहकों का कहना है कि समोसों का स्वाद बाजार में मिलने वाले कई महंगे समोसों से बेहतर है। लोग बताते हैं कि जो व्यक्ति एक बार यहां के समोसे खा लेता है, वह दोबारा जरूर आता है। कई ग्राहक तो अपने परिवार और कार्यालय के लिए अतिरिक्त समोसे पैक कराकर ले जाते हैं।
गुणवत्ता से नहीं किया गया कोई समझौता
कैंटीन में तैयार होने वाले समोसों में अच्छे स्तर का तेल, मसाले और सामग्री उपयोग की जाती है। यही कारण है कि कम कीमत होने के बावजूद स्वाद और गुणवत्ता दोनों बरकरार हैं। ग्राहकों का कहना है कि आज के समय में ₹10 में इतना अच्छा और संतोषजनक खाद्य पदार्थ मिलना अपने आप में बड़ी बात है।
चटनी ने बढ़ाया स्वाद का आनंद
समोसों के साथ परोसी जाने वाली चटनी भी लोगों को खूब पसंद आ रही है। ग्राहकों का कहना है कि चटनी और समोसे का मेल स्वाद को और भी खास बना देता है। कई लोग विशेष रूप से चटनी की तारीफ करते नजर आते हैं।
स्वच्छता व्यवस्था भी बनी चर्चा का विषय
जेल कैंटीन में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। भोजन तैयार करने से लेकर वितरण तक स्वच्छता के मानकों का पालन किया जाता है। कैंटीन परिसर में भी साफ-सुथरा वातावरण देखने को मिलता है, जिससे लोगों का भरोसा और बढ़ा है।
कुछ ही दिनों में बढ़ी ग्राहकों की संख्या
कैंटीन को शुरू हुए अभी लगभग 10 से 15 दिन ही हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में यह लोगों के बीच लोकप्रिय हो चुकी है। स्थानीय लोगों के अनुसार प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं। कई कार्यालयों और संस्थानों से 50 से 60 समोसों तक के ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। लोग समोसे पैक कराकर अपने घरों और दफ्तरों तक ले जा रहे हैं।
बंदियों को मिल रहा आत्मनिर्भरता का अवसर
इस कैंटीन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका संचालन खुली जेल में सजा काट रहे बंदियों द्वारा किया जा रहा है। इससे बंदियों को कार्य का अनुभव मिल रहा है और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है। यह पहल उन्हें समाज में सम्मानजनक तरीके से पुनर्स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
लोगों ने रखी शाम तक संचालन की मांग
ग्राहकों का कहना है कि कैंटीन को केवल दिन में ही नहीं बल्कि शाम के समय भी खोला जाना चाहिए। कई लोगों ने मांग की है कि शाम 6 बजे से 7 बजे तक भी कैंटीन का संचालन किया जाए, ताकि नौकरीपेशा लोग और कार्यालयों से लौटने वाले नागरिक भी इसका लाभ उठा सकें।
डिजिटल पेमेंट सुविधा की भी जरूरत
वर्तमान समय में अधिकांश लोग डिजिटल भुगतान का उपयोग करते हैं। ऐसे में ग्राहकों ने कैंटीन में क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था शुरू करने की मांग की है। लोगों का मानना है कि इससे ग्राहकों की संख्या और बढ़ेगी तथा भुगतान प्रक्रिया भी आसान हो जाएगी।
क्या बोले उप अधीक्षक मदन कमलेश
सेंट्रल जेल के उप अधीक्षक मदन कमलेश ने बताया कि जेल कैंटीन एक प्रयोग के रूप में शुरू की गई पहल है, जिसका उद्देश्य बंदियों को उपयोगी कार्यों से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना है। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही लोगों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और यह उत्साहजनक संकेत है।
उन्होंने बताया कि लोगों द्वारा डिजिटल भुगतान की सुविधा की मांग की जा रही है, जिस पर विचार किया जा रहा है और भविष्य में क्यूआर कोड की व्यवस्था भी की जा सकती है। इसके अलावा यदि लोगों का सहयोग और समर्थन इसी तरह मिलता रहा तो समोसों के अलावा अन्य खाद्य पदार्थों को भी कैंटीन में शामिल करने की योजना बनाई जा सकती है।
सुधार और समाज को जोड़ती अनूठी पहल
सुभाष चंद्र बोस सेंट्रल जेल की जेल कैंटीन केवल स्वादिष्ट समोसे बेचने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सुधारात्मक व्यवस्था, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी का एक सफल उदाहरण बनती जा रही है। कम कीमत, बेहतर स्वाद, स्वच्छता और बंदियों को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने की सोच ने इस पहल को विशेष बना दिया है। यदि आने वाले समय में इसमें और सुविधाएं जुड़ती हैं, तो यह कैंटीन जबलपुर की एक प्रेरणादायक पहचान बन सकती है।

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