गेहूं से मूंग तक करोड़ों का खेल! क्या जबलपुर में वर्षों से सक्रिय था फर्जी एफपीओ और खरीदी घोटालों का संगठित नेटवर्क? - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Sunday, June 7, 2026

गेहूं से मूंग तक करोड़ों का खेल! क्या जबलपुर में वर्षों से सक्रिय था फर्जी एफपीओ और खरीदी घोटालों का संगठित नेटवर्क?


 मझौली के 1.30 करोड़ के गेहूं घोटाले ने खोली नई परतें, मूंग खरीदी एफआईआर के बाद कई नामों पर टिकी जांच एजेंसियों की नजर

मझौली का गेहूं घोटाला बना नई जांच का केंद्र

मझौली में सामने आए लगभग 1 करोड़ 30 लाख रुपये के गेहूं घोटाले ने जिले की कृषि खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में कथित अंतर मिलने के बाद प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। इस मामले ने पहले से चर्चा में चल रहे फर्जी एफपीओ नेटवर्क और उससे जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मूंग खरीदी एफआईआर से खुल रही नेटवर्क की परतें

फर्जी एफपीओ के माध्यम से मूंग खरीदी में कथित अनियमितताओं के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद जांच एजेंसियों का फोकस अब पूरे नेटवर्क पर केंद्रित होता दिखाई दे रहा है। एफआईआर में संदीप दुबे, पूर्व सहायक आपूर्ति अधिकारी सुधीर दुबे सहित कई अन्य नाम सामने आने के बाद यह सवाल और तेज हो गया है कि क्या सरकारी खरीदी व्यवस्थाओं में लंबे समय से कोई संगठित तंत्र सक्रिय था।

क्या संरक्षण और प्रभाव के दम पर चलता रहा खेल?

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि कुछ लोग राजनीतिक संपर्कों और प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों की निकटता का दावा कर अधिकारियों पर दबाव बनाने का प्रयास करते रहे। आरोप यह भी लगते रहे हैं कि नियमों के तहत कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की शिकायतें जबलपुर से लेकर भोपाल तक कराई जाती थीं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जानी अभी बाकी है।

विजय नगर से पाटन तक चर्चा में नेटवर्क

मूंग खरीदी प्रकरण में नाम सामने आने के बाद विजय नगर, पाटन और ग्रामीण अंचलों तक फैले कथित नेटवर्क को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि फर्जी एफपीओ बनाकर करोड़ों रुपये की खरीदी संभव हुई तो क्या अन्य कृषि खरीदी व्यवस्थाओं में भी इसी तरह की अनियमितताएं वर्षों से चल रही थीं?

करोड़ों के लेन-देन पर उठ रहे बड़े सवाल

कृषि खरीदी, एफपीओ संचालन और सरकारी योजनाओं के नाम पर हुए करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए सवाल सामने आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई तो कई और बड़े नामों तथा कड़ियों का खुलासा हो सकता है।

क्या जांच सिर्फ मोहरों तक पहुंचेगी या सरगनाओं तक?

कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मझौली मामले में सख्त जांच और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। वहीं अब जिलेभर में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि जांच केवल नामजद आरोपियों तक सीमित रहेगी या फिर उन लोगों तक भी पहुंचेगी जिन्होंने कथित तौर पर वर्षों तक संरक्षण, सहयोग और प्रभाव के दम पर इस पूरे नेटवर्क को मजबूत बनाया।

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