धनतेरस से पहले खरीदारी का महामुहूर्त, सर्राफा कारोबारियों को अच्छे व्यापार की आस; अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करेंगे लोग
जबलपुर। दीपावली की तैयारियों के बीच आज रविवार को पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बाजार में नई उम्मीदें लेकर आया है। ज्योतिषीय मान्यताओं में पुष्य नक्षत्र को खरीदारी, निवेश और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन सोना-चांदी खरीदने से लेकर वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बर्तन और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी को लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है। इस बार पुष्य नक्षत्र के साथ रविवार का संयोग होने से इसे रवि पुष्य योग भी कहा जा रहा है।
सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि आज बाजार में अच्छी ग्राहकी निकलेगी और धनवर्षा का माहौल बनेगा। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में खरीदारी के बदलते रुझान ने यह भी दिखाया है कि बड़ी संख्या में लोग अब धनतेरस के बजाय पुष्य नक्षत्र को खरीदारी के लिए प्राथमिकता देने लगे हैं। ऐसे में व्यापारियों की निगाहें आज के बाजार पर टिकी हुई हैं।
कल सुबह तक रहेगा पुष्य नक्षत्र का प्रभाव
पंचांग के अनुसार जबलपुर में पुष्य नक्षत्र का प्रारंभ रविवार सुबह लगभग 5 बजकर 39 मिनट से हुआ है और यह सोमवार, 2 नवंबर की सुबह 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। यानी ग्राहकों के पास आज पूरे दिन और रात के बाद सोमवार की सुबह तक खरीदारी का अवसर रहेगा।
रविवार होने के कारण बाजारों में छुट्टी के दिन का लाभ भी मिल सकता है। नौकरीपेशा परिवारों से लेकर व्यापारी वर्ग तक खरीदारी के लिए समय निकाल सकता है। खासतौर पर सर्राफा बाजार, बर्तन बाजार, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑटोमोबाइल कारोबारियों को अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है।
सोने-चांदी के भाव पर भी रहेगी ग्राहकों की नजर
इस बार खरीदारी के उत्साह के बीच सोने और चांदी की कीमतें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। महंगे होते कीमती धातुओं के बीच ग्राहक अपनी जेब और जरूरत के हिसाब से खरीदारी की योजना बना रहे हैं।
1 नवंबर को उपलब्ध जबलपुर के एक सर्राफा बाजार संदर्भ भाव के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1 लाख 42 हजार 333 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत लगभग 1 लाख 30 हजार 377 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। वहीं चांदी का संदर्भ भाव लगभग 1 लाख 85 हजार रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास रहा।
हालांकि अलग-अलग बाजार स्रोतों और सर्राफा कारोबारियों के भाव में अंतर हो सकता है। आभूषणों की वास्तविक कीमत में जीएसटी, मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्क भी जुड़ते हैं।
कीमतों को देखते हुए इस बार कई ग्राहक भारी आभूषणों के बजाय हल्के वजन की ज्वेलरी, सोने के सिक्के और चांदी के छोटे आभूषण खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं।
स्टील के बर्तनों से लेकर चांदी के सिक्कों तक होगी खरीदारी
पुष्य नक्षत्र पर खरीदारी का मतलब केवल सोना-चांदी खरीदना नहीं है। भारतीय परंपरा में इस दिन घर के लिए कोई न कोई नई वस्तु खरीदना शुभ माना जाता है। यही वजह है कि बर्तन बाजार में भी अच्छी ग्राहकी की उम्मीद है।
जिन परिवारों का बजट सोने-चांदी की खरीदारी की अनुमति नहीं देता, वे अपनी सामर्थ्य के अनुसार स्टील के बर्तन, पूजा सामग्री, चांदी के छोटे सिक्के, रसोई का सामान और घरेलू उपयोग की वस्तुएं खरीदेंगे।
वहीं मध्यमवर्गीय परिवारों में भी इस दिन कुछ नया खरीदने की परंपरा देखने को मिलती है। किसी के लिए यह चांदी का सिक्का होगा तो किसी के लिए स्टील के बर्तन या घर की जरूरत का कोई सामान।
धनतेरस से पहले व्यापारियों के लिए बड़ा अवसर
इस बार धनतेरस 6 नवंबर को है, लेकिन उससे पहले ही पुष्य नक्षत्र ने बाजार को खरीदारी का एक बड़ा अवसर दे दिया है। व्यापारियों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में पुष्य नक्षत्र पर ग्राहकों का रुझान लगातार बढ़ा है। कई परिवार धनतेरस की भीड़ और व्यस्तता से बचने के लिए पुष्य नक्षत्र पर ही अपनी खरीदारी पूरी करना पसंद करते हैं।
सर्राफा कारोबारियों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद शुभ मुहूर्त पर खरीदारी करने की परंपरा लोगों को बाजार तक खींच लाती है। इसके अलावा बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी इस अवसर से अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
महंगाई के बीच आस्था और सामर्थ्य का मेल
बाजार की असली तस्वीर इस बात से भी सामने आएगी कि महंगाई के बावजूद आम परिवार किस तरह अपनी परंपराओं को निभाता है। हर व्यक्ति सोना-चांदी खरीदने की स्थिति में नहीं होता, लेकिन शुभ अवसर पर कुछ नया खरीदने की इच्छा लगभग हर परिवार में रहती है।
किसी घर में सोने की अंगूठी खरीदी जाएगी तो कहीं चांदी का सिक्का आएगा। कोई स्टील के बर्तनों से अपने घर की खुशियां बढ़ाएगा तो कोई अपनी जरूरत के अनुसार छोटी-बड़ी खरीदारी करेगा।
कुल मिलाकर पुष्य नक्षत्र ने दीपावली से पहले बाजार में उम्मीदों का नया संचार कर दिया है। अब देखना यह होगा कि ज्योतिषीय मान्यताओं और शुभ मुहूर्त के भरोसे सजा बाजार ग्राहकों की भीड़ और कारोबार के लिहाज से व्यापारियों की उम्मीदों पर कितना खरा उतरता है।

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