धनतेरस से एक दिन पहले कटौंदा प्लांट पहुंचा 2000 टन कचरा, दीपावली की खुशियों के बीच सड़कों और गलियों को स्वच्छ रखने में जुटे रहे नगर निगम के स्वच्छता संरक्षक
जबलपुर। दीपावली पर जबलपुर में इस बार खरीदारी के मामले में जहां इतिहास रचने की चर्चा है, वहीं शहर से निकले कचरे ने भी पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। लेकिन इस रिकॉर्ड के बीच एक ऐसी मेहनत भी है, जिसकी जितनी सराहना की जाए कम है। ये हैं नगर निगम के वे स्वच्छता संरक्षक, जो खुद त्योहार की खुशियों से समय निकालकर शहर को स्वच्छ रखने में जुटे रहे।
धनतेरस से एक दिन पहले जबलपुर में करीब 2000 टन कचरा कटौंदा स्थित वेस्ट टू एनर्जी प्लांट तक पहुंचा। नगर निगम के अनुसार पिछले 10 वर्षों में एक दिन में इतनी बड़ी मात्रा में कचरा पहुंचने का यह रिकॉर्ड है। इस कचरे का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया गया। लेकिन इस पूरी व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी वे कर्मचारी रहे, जिन्होंने शहर की सड़कों, गलियों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों से कचरा उठाने में दिन-रात एक कर दिया।
त्योहार की भीड़ के बीच स्वच्छता संरक्षकों ने संभाला मोर्चा
दीपावली के दौरान बाजारों में भीड़ बढ़ती है, दुकानों पर ग्राहकों का जमावड़ा रहता है और घरों से लेकर व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक बड़ी मात्रा में कचरा निकलता है। ऐसे में शहर को साफ रखना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होता।
इस चुनौती के बीच नगर निगम के स्वच्छता संरक्षकों ने जिस समर्पण के साथ काम किया, वह वास्तव में काबिले तारीफ है। सुबह से लेकर देर रात तक ये कर्मचारी कचरा संग्रहण और उठाव में लगे रहे, ताकि शहर की सड़कों पर गंदगी का ढेर न लगे और दीपावली के अवसर पर जबलपुर की स्वच्छता बनी रहे।
हम जिन कर्मचारियों को आम बोलचाल में कचरा उठाने वाला कह देते हैं, वास्तव में शहर की स्वच्छता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होती है। इनका काम केवल कचरा उठाना नहीं, बल्कि पूरे शहर को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाए रखना है।
2000 टन कचरे के पीछे छिपी है हजारों हाथों की मेहनत
कटौंदा स्थित प्लांट में एक दिन में करीब 2000 टन कचरे का पहुंचना भले ही आंकड़ों के लिहाज से एक रिकॉर्ड हो, लेकिन इस आंकड़े के पीछे उन तमाम स्वच्छता संरक्षकों का पसीना शामिल है, जिन्होंने घरों, दुकानों और बाजारों से निकले कचरे को एकत्रित कर उसे निर्धारित स्थान तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।
प्लांट में प्रतिदिन लगभग 650 टन कचरे की आवश्यकता बिजली उत्पादन के लिए बताई जाती है। कई बार जबलपुर में कचरे की उपलब्धता कम होने पर दूसरे शहरों से भी कचरा मंगाना पड़ता है। यहां तक कि प्रयागराज से भी कचरा लाकर इस प्लांट में उपयोग किया गया है।
राजनीतिक दलों और अधिकारियों का भी मिला सहयोग
शहर को स्वच्छ रखने की इस मुहिम में राजनीतिक दलों ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाए गए और नागरिकों से कचरा इधर-उधर नहीं फेंकने की अपील की गई।
वहीं नगर निगम के अधिकारियों ने भी व्यवस्थाओं पर लगातार नजर बनाए रखी। अधिकारियों की निगरानी और बेहतर प्रबंधन ने इस अभियान को गति दी। लेकिन मैदानी स्तर पर इन व्यवस्थाओं को सफल बनाने का सबसे बड़ा दायित्व स्वच्छता संरक्षकों ने ही निभाया।
अभी दीपावली का एक दिन बाकी, टूट सकते हैं और रिकॉर्ड
इस बार कचरे ने पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, लेकिन दीपावली का एक दिन अभी बाकी है। ऐसे में बाजारों और घरों से कचरा निकलने का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। हो सकता है कि आने वाले दिन में कचरे की मात्रा का एक नया रिकॉर्ड भी बन जाए।
सम्मान के असली हकदार हैं स्वच्छता संरक्षक
दीपावली पर हर कोई अपने घर को रोशन करने और परिवार के साथ खुशियां मनाने में व्यस्त रहता है। लेकिन शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी निभाने वाले ये स्वच्छता संरक्षक अपने काम में जुटे रहते हैं। कई बार इन्हें वह सम्मान भी नहीं मिल पाता, जिसके ये वास्तव में हकदार हैं।
इसलिए इस दीपावली पर जबलपुर नगर निगम के उन तमाम स्वच्छता संरक्षकों को विशेष धन्यवाद देना जरूरी है, जिन्होंने त्योहार के दौरान शहर की स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझा और पूरी निष्ठा से काम किया।
अधिकारियों की निगरानी, राजनीतिक दलों की जागरूकता और नागरिकों के सहयोग ने निश्चित ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन शहर को साफ रखने के लिए सबसे ज्यादा मेहनत मैदान में उतरकर काम करने वाले इन्हीं स्वच्छता संरक्षकों ने की है।

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