जबलपुर। करवा चौथ का पर्व पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का प्रतीक माना जाता है। इस दिन सुहागिनें चांद का दीदार कर अपने पति की सलामती की दुआ मांगती हैं, लेकिन जबलपुर की एक पत्नी ने इस पर्व को प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल बना दिया, जिसने पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई को एक नया अर्थ दे दिया। यहां रश्मि गुप्ता ने केवल पति की लंबी उम्र की कामना ही नहीं की, बल्कि अपनी एक किडनी दान कर उन्हें जिंदगी का अनमोल तोहफा दे दिया। करवा चौथ के मौके पर सामने आई यह कहानी निश्चित ही भावुक करने वाली है।
जब पति की जिंदगी पर आया संकट, पत्नी ने लिया बड़ा फैसला
शांतिनगर निवासी दीपक गुप्ता लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से परेशान थे। बीमारी के चलते उनके सामने उपचार की चुनौती लगातार बढ़ रही थी। ऐसे मुश्किल दौर में परिवार के लिए सबसे बड़ा सवाल दीपक की जिंदगी को सुरक्षित रखने का था। इस कठिन परिस्थिति में उनकी पत्नी रश्मि गुप्ता ने ऐसा निर्णय लिया, जो उनके अटूट प्रेम और साहस को दर्शाता है। उन्होंने पति को अपनी किडनी देने का फैसला किया और इस तरह उनके जीवन को नई उम्मीद देने की राह तैयार हुई।
रिश्ते की कसौटी पर खरा उतरा प्रेम, पत्नी बनी जीवनदाता
आमतौर पर करवा चौथ पर पत्नी अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है, लेकिन रश्मि गुप्ता ने अपने त्याग से इस पर्व की भावना को एक अलग ही ऊंचाई दे दी। उन्होंने अपने पति के बेहतर भविष्य के लिए अपनी किडनी दान की। यह फैसला केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि उस विश्वास और समर्पण की कहानी है, जो मुश्किल समय में रिश्तों की असली ताकत बनकर सामने आता है।
मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में सफल हुआ किडनी प्रत्यारोपण
दीपक गुप्ता के उपचार के लिए जबलपुर के मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। अस्पताल की नेफ्रोलॉजी एवं ट्रांसप्लांट यूनिट के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। प्रत्यारोपण की इस पूरी प्रक्रिया में डॉ. राजेश पटेल और ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विशाल वडेरा सहित चिकित्सा टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार फिलहाल रश्मि और दीपक दोनों की स्थिति स्वस्थ बताई गई है।
जबलपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के क्षेत्र में अस्पताल की उपलब्धि
मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल के डायरेक्टर राजीव बडेरिया के मुताबिक, अस्पताल में अब तक 30 से अधिक किडनी प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि विशेषज्ञ चिकित्सकों, तकनीकी स्टाफ और अन्य चिकित्सा कर्मियों के सामूहिक प्रयासों से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रत्यारोपण उपचार की एक महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति है, जो उपयुक्त परिस्थितियों में उन्हें सामान्य जीवन की ओर लौटने का अवसर दे सकती है।
अंगदान की अहमियत भी समझा गई रश्मि की पहल
रश्मि गुप्ता का यह कदम सिर्फ एक परिवार की खुशियों की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि अंगदान के प्रति समाज को जागरूक करने वाला उदाहरण भी है। आज भी अंगदान को लेकर लोगों के मन में कई तरह की भ्रांतियां और संकोच मौजूद हैं। ऐसे में रश्मि का साहस यह संदेश देता है कि अंगदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवन की नई शुरुआत बन सकता है। हालांकि अंगदान और प्रत्यारोपण का निर्णय हमेशा चिकित्सकीय जांच, उपयुक्तता और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर ही किया जाता है।
करवा चौथ की कहानी में जुड़ गया त्याग और जीवनदान का अध्याय
करवा चौथ पर चांद देखकर पति की लंबी उम्र की कामना करने की परंपरा वर्षों पुरानी है, लेकिन रश्मि और दीपक गुप्ता की कहानी इस पर्व को एक भावनात्मक संदेश दे गई। एक ओर पति की जिंदगी बीमारी से संघर्ष कर रही थी, तो दूसरी ओर पत्नी ने अपनी किडनी देकर उस संघर्ष में सबसे बड़ा साथ निभाया। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि प्रेम केवल शब्दों और रस्मों तक सीमित नहीं होता, बल्कि जरूरत पड़ने पर त्याग, साहस और समर्पण के रूप में भी सामने आता है।
रश्मि ने करवा चौथ पर चांद से पति की उम्र नहीं मांगी, बल्कि खुद अपने त्याग से पति की जिंदगी में नई रोशनी भरने की कोशिश की।

No comments:
Post a Comment