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Friday, October 2, 2026

गांधी जयंती पर जेल के खुले दरवाजे, 5 आजीवन कारावास के बंदियों को मिली स्थायी रिहाई

 14 साल की सजा और अच्छे आचरण का मिला लाभ, अपनों से मिलकर भावुक हुए बंदी

जबलपुर। गांधी जयंती के अवसर पर केंद्रीय जेल जबलपुर में उस समय भावुक माहौल देखने को मिला, जब आजीवन कारावास की सजा काट रहे 5 बंदियों को स्थायी रूप से रिहा किया गया। वर्षों से जेल की चारदीवारी में रह रहे इन बंदियों के लिए 2 अक्टूबर का दिन नई जिंदगी की शुरुआत लेकर आया। जेल से बाहर निकलते ही बंदियों के चेहरों पर अपनों से मिलने की खुशी साफ दिखाई दी।

अब साल में पांच मौकों पर रिहाई का प्रावधान

शासन के नए नियमों के तहत अब अच्छे आचरण वाले पात्र बंदियों को साल में दो अवसरों के बजाय पांच विशेष अवसरों पर रिहाई का लाभ दिया जाता है। इनमें 26 जनवरी, 14 अप्रैल, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर और 15 नवंबर शामिल हैं। इसी व्यवस्था के तहत गांधी जयंती पर केंद्रीय जेल जबलपुर से 5 बंदियों को रिहा किया गया।

14 साल जेल में पूरे, सुधरा आचरण तो मिली आजादी

जेल अधीक्षक के अनुसार धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा काट रहे ऐसे बंदियों को रिहाई का लाभ दिया गया, जिन्होंने जेल में निर्धारित अवधि पूरी करने के साथ ही अपने आचरण में उल्लेखनीय सुधार किया। इन बंदियों ने जेल में लंबे समय तक अनुशासन और अच्छे व्यवहार का परिचय दिया, जिसके बाद उन्हें स्थायी रिहाई के लिए पात्र माना गया।

कटनी, सिवनी, बालाघाट और जबलपुर के बंदी हुए रिहा

गांधी जयंती पर रिहा किए गए बंदी कटनी, सिवनी, बालाघाट और जबलपुर के रहने वाले बताए गए हैं। वर्षों बाद जेल से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर खुशी और भावुकता दोनों दिखाई दी। परिजनों ने भी अपने प्रियजनों को गले लगाकर उनका स्वागत किया।

1996 में मिली थी उम्रकैद, अब पूरी तरह आजाद हुए शिवेंद्र सिंह परिहार

रिहा हुए बंदियों में बालाघाट निवासी शिवेंद्र सिंह परिहार भी शामिल हैं। उन्हें वर्ष 1996 में हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। शिवेंद्र सिंह ने अपनी स्थायी रिहाई के बाद भावुक होते हुए कहा कि अब वे अपने पिता, दोस्तों और परिवार के बीच शांति और सादगी के साथ शेष जीवन बिताना चाहते हैं।

2003 में प्रोवेशन एक्ट के तहत मिली थी रिहाई

शिवेंद्र सिंह के अनुसार वर्ष 2003 में प्रोवेशन एक्ट के तहत रिहाई मिलने के बाद वे लगातार शासकीय ठेकेदारी का काम करते रहे। अब स्थायी रिहाई के बाद उन्होंने परिवार के साथ सामान्य जीवन जीने और कानून का पालन करते हुए आगे बढ़ने की इच्छा जताई।

जेल से रिहाई बनी दूसरे बंदियों के लिए संदेश

जेल प्रशासन का मानना है कि गांधी जयंती जैसे अवसर पर अच्छे आचरण वाले बंदियों की रिहाई अन्य बंदियों के लिए भी प्रेरणा का काम करती है। इससे उन्हें अपने व्यवहार में सुधार लाने और अपराध की राह छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर मिलता है।

नई जिंदगी का संकल्प लेकर निकले बंदी

जेल से बाहर आए बंदियों ने भी संकल्प जताया कि अब वे कानून का पालन करते हुए मेहनत और ईमानदारी से जीवन यापन करेंगे। वर्षों बाद खुले आसमान के नीचे अपनों के बीच पहुंचने की खुशी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दी। गांधी जयंती पर हुई यह रिहाई उनके लिए केवल जेल से बाहर निकलने का दिन नहीं, बल्कि एक नई जिंदगी की शुरुआत बन गई।

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