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Monday, August 3, 2026

हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा जबलपुर, सावन के पहले सोमवार शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब

कांवड़ यात्राएं निकलीं, शारदा मंदिर में चढ़े श्रद्धा के ध्वज, गुप्तेश्वर से कचनार सिटी तक दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें

जबलपुर। सावन के पावन सोमवार पर संस्कारधानी जबलपुर पूरी तरह शिवमय नजर आई। शहर के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालु घंटों कतारों में खड़े रहे। वहीं शहर के विभिन्न क्षेत्रों से कांवड़ यात्राएं भी निकाली गईं, जिनमें बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और बच्चे शामिल हुए।

23 किलोमीटर पैदल चलकर इंद्राणा में किया जलाभिषेक

सावन सोमवार के अवसर पर कांवड़ियों ने मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर लगभग 23 किलोमीटर की पदयात्रा की। श्रद्धालु पूरे उत्साह और भक्ति के साथ इंद्राणा स्थित भगवान भोलेनाथ के मंदिर पहुंचे, जहां शिवलिंग का विधि-विधान से जलाभिषेक कर परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, ढोल-नगाड़ों और "बोल बम" के जयघोष से माहौल भक्तिमय बना रहा।

शारदा मंदिर में निभाई गई ध्वज चढ़ाने की वर्षों पुरानी परंपरा

मदन महल स्थित प्रसिद्ध शारदा मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। यहां सावन सोमवार पर ध्वज चढ़ाने की वर्षों पुरानी परंपरा निभाई गई। जिन भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हुईं, वे ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ मंदिर पहुंचे तथा माता को श्रद्धा का ध्वज अर्पित किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तों का तांता लगा रहा और श्रद्धालुओं ने माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रृंगार की थालियां लेकर पहुंचीं महिलाएं

सावन सोमवार पर महिलाओं में भी विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न महिला मंडल और समूह पारंपरिक वेशभूषा में माता के श्रृंगार की थालियां लेकर मंदिर पहुंचे। जय माता दी के जयकारों और मंगल गीतों के बीच महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्ति का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

गुप्तेश्वर महादेव में दिनभर चलता रहा रुद्राभिषेक

शहर के प्राचीन एवं प्रसिद्ध गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पावन स्थल का उल्लेख नर्मदा पुराण में मिलता है। श्रद्धालुओं की आस्था है कि यह भगवान शिव के अत्यंत पवित्र उप-शिवलिंगों में से एक है। मान्यता यह भी है कि वनवास काल के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने जवाली ऋषि के मार्गदर्शन में यहां गुप्त रूप से भगवान शिव का रुद्राभिषेक किया था। इसी आस्था के कारण सावन में यहां दर्शन और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है।

कचनार सिटी में बैठे भोलेनाथ के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

विजयनगर स्थित कचनार सिटी में विराजमान भगवान भोलेनाथ की विशाल बैठी हुई प्रतिमा के दर्शन के लिए भी दिनभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। दूर-दूर से पहुंचे भक्तों ने भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।

भक्ति और उत्साह से सराबोर रही संस्कारधानी

सावन सोमवार पर जबलपुर के प्रमुख शिवालयों, शक्ति पीठों और मंदिरों में दिनभर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। कांवड़ यात्राओं, जलाभिषेक, ध्वज अर्पण, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों ने पूरे शहर को शिवमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ और मां भगवती से सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

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