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Wednesday, July 8, 2026

फव्वारा हादसा: क्या अब जागेगा नगर निगम, या फिर नोटिस चिपकाकर खत्म हो जाएगी जिम्मेदारी?

  चार मंजिला जर्जर भवन गिरने से टला बड़ा हादसा, शहर के दर्जनों खतरनाक भवन अब भी मौत बनकर खड़े।


जबलपुर

बड़ा फव्वारा स्थित समिति साड़ी भंडार के ऊपर बना चार मंजिला जर्जर भवन मंगलवार को भरभराकर गिर गया। राहत की बात यह रही कि मंगलवार होने के कारण इस क्षेत्र का बाजार बंद था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। यदि यही घटना किसी सामान्य कारोबारी दिन होती, तो भीड़भाड़ के बीच बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद नगर निगम प्रशासन वास्तव में जागेगा या फिर कुछ दिनों की औपचारिक कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

नोटिस चिपकाकर खत्म हो जाती है जिम्मेदारी?

शहर में वर्षों से यह देखा जा रहा है कि नगर निगम जर्जर भवनों पर केवल नोटिस चिपकाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है। भवन मालिकों को समय सीमा देकर छोड़ दिया जाता है, लेकिन समय समाप्त होने के बाद यह देखने तक कोई नहीं पहुंचता कि भवन सुरक्षित हुआ या नहीं। यही लापरवाही भविष्य के हादसों की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है।

मुख्य बाजारों में मौत बनकर खड़े हैं जर्जर भवन

बड़ा फव्वारा, सुपर मार्केट, घोड़ा नक्कास और आसपास के व्यस्त बाजारों में आज भी दर्जनों ऐसे भवन मौजूद हैं, जिनकी हालत बेहद खतरनाक है। नीचे दुकानें संचालित हो रही हैं, लोग खरीदारी कर रहे हैं और ऊपर जर्जर इमारतें कभी भी गिरने का इंतजार करती नजर आती हैं। अनुमान है कि सुपर मार्केट से घोड़ा नक्कास तक करीब 30 से 40 भवन ऐसे हैं, जिन्हें तत्काल चिन्हित कर कार्रवाई की आवश्यकता है।

मंदिरों पर तुरंत कार्रवाई, लेकिन जर्जर भवनों पर ढिलाई क्यों?

शहर में अतिक्रमण हटाने या सड़क चौड़ीकरण के दौरान कई बार धार्मिक स्थलों को भी हटाने की कार्रवाई तेजी से होती दिखाई देती है। ऐसे में आम लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जब प्रशासन मजबूत निर्माणों पर भी तत्काल कार्रवाई कर सकता है, तो वर्षों से लोगों की जान के लिए खतरा बने जर्जर भवनों पर इतनी सुस्ती क्यों दिखाई देती है? यदि किसी भवन को खाली कराने में मकान मालिक या किरायेदार बाधा बन रहे हैं, तो प्रशासन को कानूनी प्रक्रिया अपनाकर समाधान निकालना चाहिए। लोगों की जान से बढ़कर कोई विवाद या प्रक्रिया नहीं हो सकती।

अंधेरदेव क्षेत्र में दो वर्षों से बना हुआ है खतरा

अंधेरदेव रोड पर पिछले लगभग दो वर्षों से एक जर्जर भवन के नीचे नाश्ते की दुकान और ठेले संचालित हो रहे हैं। वहीं ऊपर भवन के अंदर खाद्य सामग्री तैयार की जा रही है। सामने एक अन्य भवन भी पूरी तरह जर्जर अवस्था में खड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन निगम की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

त्योहारों से पहले बढ़ जाएगा खतरा

आने वाले दिनों में सावन, रक्षाबंधन, हरियाली अमावस्या, जन्माष्टमी सहित कई प्रमुख पर्व हैं। इन अवसरों पर बड़ा फव्वारा से घोड़ा नक्कास तक हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है। यदि ऐसे ही जर्जर भवन खड़े रहे, तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन के पास अभी भी समय है कि वह जोखिम वाले भवनों को चिन्हित कर कार्रवाई करे।

महापौर ने दिए निर्देश, लेकिन अब चाहिए जमीनी कार्रवाई

हादसे के बाद महापौर जगत बहादुर सिंह 'अन्नू' ने अधिकारियों को फोन पर आवश्यक निर्देश दिए। संभव है कि किसी कारणवश वह मौके पर नहीं पहुंच सके हों, लेकिन अब आवश्यकता केवल निर्देशों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कठोर कार्रवाई की है। नगर निगम को स्वयं अभियान चलाकर खतरनाक भवनों को हटाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।

भवन मालिकों पर भी हो सख्त कार्रवाई

जो भवन मालिक नोटिस मिलने के बाद भी जर्जर भवनों को नहीं हटाते और लोगों की जान जोखिम में डालते हैं, उनके खिलाफ केवल चेतावनी नहीं बल्कि जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी होनी चाहिए। जनहित से बड़ा कोई निजी स्वार्थ नहीं हो सकता।

हर हादसे में सबसे पहले पहुंचती है पुलिस

हर बड़ी दुर्घटना में सबसे पहले पुलिस प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटता है। बड़ा फव्वारा हादसे में भी यही देखने को मिला। नगर निगम की टीम बाद में पहुंची, जबकि शुरुआती जिम्मेदारी पुलिस ने संभाली। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस विभाग की जिम्मेदारी जर्जर भवनों की निगरानी और कार्रवाई की है, वह हादसे से पहले सक्रिय क्यों नहीं होता?

जनप्रतिनिधियों को भी निभानी होगी जिम्मेदारी

यह केवल नगर निगम का विषय नहीं है। पक्ष और विपक्ष के सभी जनप्रतिनिधियों को भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाना चाहिए। बरसात शुरू होने से पहले पूरे शहर का सर्वे कराकर सभी खतरनाक भवनों को चिन्हित किया जाए और आवश्यकतानुसार उन्हें हटाया जाए, ताकि किसी परिवार को अपनों की जान न गंवानी पड़े।

अब कार्रवाई का समय है, औपचारिकता का नहीं

बड़ा फव्वारा हादसा एक चेतावनी है। यदि इसके बाद भी प्रशासन केवल नोटिस चिपकाने और खानापूर्ति तक सीमित रहा, तो अगली दुर्घटना में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल नहीं होगा। शहरवासियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए नगर निगम तथा जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर जर्जर भवनों पर निर्णायक कार्रवाई करनी होगी। अब सवाल यही है—क्या यह हादसा प्रशासन को जगाएगा, या फिर सब कुछ पहले की तरह चलता रहेगा?

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