जबलपुर: ठाकुर चाट भंडार के 'काले साम्राज्य' पर खाद्य विभाग का वज्रपात, अधिकारी देवेंद्र कुमार दुबे ने खोला गंदगी का कच्चा चिट्ठा! - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Friday, May 15, 2026

जबलपुर: ठाकुर चाट भंडार के 'काले साम्राज्य' पर खाद्य विभाग का वज्रपात, अधिकारी देवेंद्र कुमार दुबे ने खोला गंदगी का कच्चा चिट्ठा!

 


जबलपुर। शहर के स्वाद के शौकीनों के लिए आज एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। कमानिया गेट स्थित प्रसिद्ध 'ठाकुर चाट भंडार', जहाँ महिलाओं और चटपटा खाने वालों की भारी भीड़ उमड़ती थी, वह दरअसल बीमारी और गंदगी का केंद्र निकला। खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार दुबे ने छापे के दौरान वह घिनौना सच बेनकाब किया है, जिसे रसूख की चादर से ढका गया था।

​ पसीने और धूल के बीच तैयार हो रहा था 'स्वाद का जहर'

​खाद्य सुरक्षा अधिकारी देवेंद्र कुमार दुबे जब अपनी टीम के साथ राम मंदिर, दीक्षितपुरा स्थित उस ठिकाने पर पहुंचे जहाँ चाट की सामग्री बनती थी, तो वहां का दृश्य विचलित करने वाला था। चारों ओर धूल की परतें जमी थीं और पसीने से लथपथ लड़के खुले में समोसे, कचौरियां और पापड़ी तैयार कर रहे थे। जिस सामग्री को लोग उंगलियां चाटकर खाते थे, उसे बनाने में स्वच्छता के न्यूनतम मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा था।

 लाइसेंस के नाम पर संचालक का 'सन्नाटा', नियमों की उड़ी धज्जियां

​जब अधिकारी देवेंद्र कुमार दुबे ने संचालक से निर्माण स्थल और खाद्य सामग्री तैयार करने का लाइसेंस मांगा, तो संचालक के पास कोई जवाब नहीं था। बिना किसी वैध लाइसेंस के इतने बड़े पैमाने पर जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। अधिकारी ने मौके पर ही संचालक को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि बिना मानकों के इस तरह का संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 सी.एम और कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा: घरेलू गैस सिलेंडरों का बड़ा खेल

​कार्यवाही के दौरान एक और गंभीर मामला सामने आया। मुख्यमंत्री और कलेक्टर के स्पष्ट आदेश हैं कि घरेलू गैस सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद, ठाकुर चाट भंडार में एक साथ 4-4 घरेलू सिलेंडर धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जा रहे थे। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि उन आम नागरिकों के हक पर डाका है जो सिलेंडरों के लिए लंबी कतारों में खड़े रहते हैं।

 खाद्य आपूर्ति विभाग की संदिग्ध चुप्पी: फोन बजते रहे, अधिकारी सोते रहे

​इस पूरी कार्यवाही में सबसे शर्मनाक भूमिका खाद्य आपूर्ति विभाग की रही। जब मौके पर अवैध सिलेंडरों का भंडार मिला, तो क्षेत्रीय लोगों और उपस्थित टीम द्वारा आपूर्ति विभाग के अधिकारियों को बार-बार फोन लगाए गए। लेकिन अधिकारियों ने फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझा। सवाल उठता है कि क्या आपूर्ति विभाग के अधिकारी जानबूझकर इस कालाबाजारी से आंखें मूंदे हुए थे?

रसूख के चलते 'बैक डोर' से भागे संचालक, साक्ष्य मिटाने का मिला मौका

​आपूर्ति विभाग की सुस्ती का पूरा फायदा ठाकुर चाट भंडार के संचालक ने उठाया। जैसे ही उसे अहसास हुआ कि मामला बिगड़ रहा है, उसने तुरंत वहां से गैस सिलेंडर अलग करवाए और मौके से भाग निकला। आरोप है कि यदि खाद्य आपूर्ति विभाग ने तत्परता दिखाई होती, तो बड़ी जब्ती संभव थी। लेकिन विभाग की देरी ने संचालक को साक्ष्य मिटाने और फरार होने का "सुरक्षित रास्ता" दे दिया।

 क्या 'खास संबंधों' के कारण बचता रहा चाट भंडार?

​क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि कई रसूखदार और विभाग की महिला अधिकारी यहाँ की नियमित ग्राहक रही हैं। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या इसी 'जीभ के स्वाद' और 'खास संबंधों' की वजह से इतने वर्षों से इस गंदगी और अवैध गतिविधियों पर पर्दा डाला गया था? हालांकि, देवेंद्र कुमार दुबे की सख्त कार्यवाही ने स्पष्ट कर दिया है कि अब रसूख नहीं, बल्कि जनता की सेहत और कानून सर्वोपरि होगा।



प्रशासनिक संदेश: यह कार्यवाही उन सभी मिलावटखोरों और लापरवाह अधिकारियों के लिए चेतावनी है जो जनता के स्वास्थ्य को दांव पर लगाकर अपनी जेबें भर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि फोन न उठाने वाले आपूर्ति विभाग के जिम्मेदारों पर कलेक्टर क्या एक्शन लेते हैं।

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