- न्यायिक हंटर: बरगी क्रूज हादसे पर कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, चालक और क्रू की लापरवाही को बताया अक्षम्य अपराध।
- FIR का आदेश: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 और 110 के तहत मुकदमा दर्ज करने के लिए पुलिस को 48 घंटे की मोहलत।
- कड़ी टिप्पणी: यात्रियों को मरता छोड़ खुद भागने वाले चालक दल के कृत्य को कोर्ट ने माना आपराधिक षड्यंत्र।
- 30 अप्रैल की त्रासदी: 13 मौतों के बाद अब कानून का शिकंजा, सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर न्यायपालिका का कड़ा रुख।
- जांबाजों को सलाम: अपनी जान पर खेलकर दूसरों को बचाने वाले स्थानीय नायकों की अदालत ने की मुक्त कंठ से सराहना।
जबलपुर | प्रसव काल की पीड़ा झेल रहे पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद जगी है। बरगी बांध में हुए उस रूह कंपा देने वाले क्रूज हादसे पर न्यायपालिका ने कड़ा प्रहार किया है। प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 'स्वतः संज्ञान' लिया और स्पष्ट कर दिया कि मासूमों की मौत पर खामोश नहीं बैठा जा सकता। कोर्ट ने पुलिस को दो टूक लहजे में आदेश दिया है कि हादसे के लिए जिम्मेदार चालक और क्रू सदस्यों के खिलाफ तत्काल आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
अदालत का तीखा प्रहार: 'यह महज चूक नहीं, आपराधिक कृत्य है'
अदालत ने सुनवाई के दौरान अत्यंत तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि स्पष्ट रूप से आपराधिक लापरवाही का परिणाम है। कोर्ट ने रेखांकित किया कि क्रूज का चालक, जिसे पानी की गहराई और संभावित खतरों का पूरा तकनीकी ज्ञान था, उसने संकट के समय यात्रियों के प्रति अपनी नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। जब लोग लहरों के बीच जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, तब चालक और क्रू के सदस्य उन्हें मझधार में मरता हुआ छोड़ स्वयं सुरक्षित निकल गए। न्यायालय ने इस कृत्य को भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 106 और 110 के तहत गंभीर अपराध माना है।
30 अप्रैल की वह काली शाम और प्रशासन को अल्टीमेटम
विदित हो कि 30 अप्रैल 2026 को बरगी डैम के गहरे पानी में एक क्रूज जलमग्न हो गया था, जिसमें 13 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस हादसे ने सुरक्षा इंतजामों और पर्यटन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब अदालत ने बरगी थाना प्रभारी को सख्त हिदायत दी है कि अगले दो कार्यदिवस के भीतर इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच की प्रगति रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि यदि इस स्तर पर कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो रसूखदारों की ऐसी लापरवाहियां भविष्य में भी मासूमों की जान लेती रहेंगी।
इंसानियत की मिसाल: जांबाजों की सराहना
न्यायालय ने जहाँ एक ओर लापरवाह सिस्टम और भगोड़े चालक दल को फटकार लगाई, वहीं दूसरी ओर उन साहसी लोगों को सलाम भी किया जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। कोर्ट ने माना कि अगर स्थानीय लोगों और गोताखोरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर मोर्चा न संभाला होता, तो मृतकों का आंकड़ा और भी भयावह हो सकता था। कानून की इस सख्ती के बाद अब बरगी क्षेत्र में पर्यटन माफियाओं और नियमों की अनदेखी करने वालों में हड़कंप मच गया है।
मनीष मिश्रा ( अध्यक्ष जिला बार एसोसिएशन)
हाईकोर्ट का यह जो फरमान आया है यह निश्चित ही स्वागत योग्य है । क्योंकि बरगी डैम हादसे में जो 13 लोग मौत के मुंह में समा गए, अब उनको इंसाफ मिलेगा। किसी का बेटा किसी की पत्नी जिनके आंसू हाईकोर्ट ने समझे हैं। और निश्चित ही निगरानी में जब हाईकोर्ट की जांच होगी तो एक भी अधिकारी बच नहीं पाएगा।


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