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Friday, May 15, 2026

जोर का झटका इस बार धीरे से नहीं जोर से लगा है, पेट्रोल डीजल 3 रू महंगा

 


प्रथम टुडे/ जबलपुर

देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आज बड़ा इजाफा कर दिया गया। सरकारी तेल कंपनियों द्वारा करीब चार साल बाद एक साथ ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। नई दरें शुक्रवार सुबह 6 बजे से लागू हो गईं, जिसके बाद आम जनता को अब हर लीटर पेट्रोल और डीजल के लिए पहले से अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार और बढ़ती लागत बनी वजह

जानकारी के अनुसार पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में लगभग ₹3 प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है। तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय से कीमतें स्थिर रखने के बाद अब लागत का दबाव बढ़ने लगा था, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा।

महानगरों में नई कीमतें लागू

नई कीमतों के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। वहीं मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में भी कीमतों में ₹3 से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। मध्य प्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी पेट्रोल पंपों पर नई दरें लागू कर दी गई हैं।

परिवहन और रोजमर्रा की चीजों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का असर सीधे आम आदमी की जिंदगी पर दिखाई देगा। परिवहन लागत बढ़ने से सब्जियां, दूध, राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो मालभाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन जाएगा।

रैपिडो, ऑटो और कैब सेवाओं पर भी दिख सकता है असर

लोगों का मानना है कि पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद रैपिडो, ऑटो रिक्शा, ओला और अन्य कैब सेवाओं के किराए में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। रोजाना इन सेवाओं का उपयोग करने वाले नौकरीपेशा और छात्र वर्ग पर इसका सीधा असर पड़ेगा। यदि ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में शहरों में यात्रा करना और महंगा हो सकता है।

मोदी सरकार के पुराने संदेश की भी हो रही चर्चा

आम जनों के बीच इस बात की भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री Narendra Modi ने पहले ईंधन बचत को लेकर बड़ा संदेश दिया था। उस दौरान प्रधानमंत्री के काफिले में वाहनों की संख्या कम किए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद कई मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिलों को सीमित करने की पहल की थी। लोगों का कहना है कि सरकार लगातार ईंधन बचाने की अपील करती रही है, लेकिन अब कीमतों में बढ़ोतरी से आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता दिखाई दे रहा है।

महंगाई के बीच बढ़ी जनता की चिंता

लगातार बढ़ती महंगाई के बीच ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी चिंता बन सकती है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि पहले से महंगाई झेल रही जनता पर अब अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।

आगे क्या होगी स्थिति, इस पर टिकी निगाहें

हालांकि सरकार का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को देखते हुए यह कदम जरूरी था। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिलती है या फिर पेट्रोल-डीजल के दामों में और बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

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