बरगी क्रूज हादसा: 'गुनाहगार' सिस्टम का सबसे बड़ा पर्दाफाश! अधिकारियों को पहले से पता था—'पानी में मौत बनकर उतरेगा यह क्रूज' - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

Breaking

Wednesday, May 13, 2026

बरगी क्रूज हादसा: 'गुनाहगार' सिस्टम का सबसे बड़ा पर्दाफाश! अधिकारियों को पहले से पता था—'पानी में मौत बनकर उतरेगा यह क्रूज'

 


जबलपुर। बरगी बांध के गहरे पानी में समाई 13 जिंदगियों की मौत का जिम्मेदार केवल 'खराब मौसम' नहीं, बल्कि पर्यटन विभाग की वह फाइलों में दबी लापरवाही है जिसे 'गोपनीय' कहकर छिपाया जा रहा था। हादसे के बाद अब ऐसे सनसनीखेज दस्तावेज सामने आए हैं, जो चीख-चीखकर गवाही दे रहे हैं कि अफसरों को पहले से मालूम था कि यह क्रूज चलने लायक नहीं है, फिर भी इसे 'मौत की सैर' पर उतारा गया।

मैकल रिसॉर्ट मैनेजर की चेतावनियों को रद्दी समझकर फेंका गया

​खुलासा हुआ है कि मैकल रिसॉर्ट के प्रबंधक ने एक नहीं, बल्कि पत्र क्रमांक 45, 108 और 169 के जरिए आला अधिकारियों को बार-बार आगाह किया था। 1 मार्च 2026 को भेजे गए पत्र में स्पष्ट लिखा गया था कि 'मैकल सुता' क्रूज अपनी उम्र पूरी कर चुका है।

  • जर्जर इंजन: क्रूज का एक इंजन पूरी तरह फेल था और दूसरा लोड नहीं ले पा रहा था।
  • स्पीड बोट का सहारा: आलम यह था कि क्रूज को किनारे तक लाने के लिए अक्सर स्पीड बोट की मदद लेनी पड़ती थी।
  • खतरे की अनदेखी: 2006-07 के इन पुराने इंजनों के स्पेयर पार्ट्स तक बाजार में उपलब्ध नहीं थे, फिर भी इन्हें पर्यटकों के हवाले कर दिया गया।

​यह वह पत्र

कमाने के चक्कर में जान से समझौता?

​हैरानी की बात यह है कि इसी तरह का 'रेवा क्रूज' जनवरी 2025 में ही जवाब दे गया था, जिसे तकनीकी विशेषज्ञों ने 'अनफिट' घोषित कर दिया था। इसके बावजूद, सीजन में पर्यटकों की भारी भीड़ और कमाई के लालच में पर्यटन विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय ने दूसरे जर्जर क्रूज का संचालन बंद नहीं किया।

​"जब हैदराबाद की कंपनी ने साफ कह दिया था कि इंजन बदलने होंगे, तो फिर पुराने इंजन के भरोसे क्रूज को बीच लहरों में भेजने की अनुमति किसने दी?"

हवा का झोंका नहीं, प्रशासनिक अनदेखी है काति

​30 अप्रैल 2026 की उस काली शाम को जब मौसम बिगड़ा, तो जर्जर इंजन ने जवाब दे दिया। अगर इंजन दुरुस्त होता, तो शायद लहरों और हवाओं के बीच क्रूज को नियंत्रित किया जा सकता था। ऊपर से ओवरलोडिंग और लाइफ जैकेट देने में बरती गई लापरवाही ने इस हादसे को और भयावह बना दिया।

अब केवल छोटे कर्मचारियों पर गाज क्यों?

​हादसे के बाद प्रशासन अक्सर चालकों और निचले स्टाफ पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन इन 'गोपनीय पत्रों' ने अब वरिष्ठ अधिकारियों की गर्दन भी फंसा दी है। सवाल यह है कि जब मुख्यालय तक खतरे की सूचना थी, तो पर्यटन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी गहरी नींद में क्यों सोए थे?

सच की बात सबके साथ: 'प्रथम टुडे' इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करता है ताकि दिल्ली और तिरुचिरापल्ली के उन परिवारों को न्याय मिल सके जिन्होंने सिस्टम की लापरवाही के कारण अपनों को खोया है।

No comments:

Post a Comment