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Tuesday, July 14, 2026

चार दिन तक नाले में तड़पती रही बेजुबान गाय महिला की इंसानियत बनी जीवनदान, नगर निगम की रेस्क्यू टीम ने बचाई जान

 

चार दिन तक बेबस पड़ी रही गाय

जबलपुर। घमापुर के व्यवहारबाग स्थित खंडेलवाल कंपाउंड में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने इंसानियत, जिम्मेदारी और प्रशासनिक तत्परता—तीनों की तस्वीर एक साथ सामने रख दी। यहां एक बेजुबान गाय पिछले चार दिनों से पक्के नाले के किनारे बने कच्चे नाले में फंसी हुई थी। बाहर निकलने के लिए वह लगातार संघर्ष करती रही, लेकिन उसका मालिक उसे ढूंढने तक नहीं पहुंचा। चार दिनों तक भूख-प्यास और गंदगी के बीच गाय तड़पती रही।

क्षेत्रीय महिला ने निभाया मानवता का धर्म

जब अधिकांश लोग इस घटना को अनदेखा कर रहे थे, तब क्षेत्र की एक महिला ने इंसानियत की मिसाल पेश की। उन्होंने गाय को बेसहारा छोड़ने के बजाय लगातार चार दिनों तक उसे रोटी और अन्य खाद्य सामग्री खिलाई। महिला को उम्मीद थी कि शायद गाय किसी तरह स्वयं बाहर निकल आएगी, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने नगर निगम को सूचना देकर उसकी जान बचाने की पहल की।

सूचना मिलते ही हरकत में आया नगर निगम

महिला की सूचना मिलते ही नगर निगम और फायर ब्रिगेड की टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंच गई। फायर ब्रिगेड प्रभारी कुशाग्र ठाकुर के निर्देशन एवं संतोष नामदेव के नेतृत्व में रेस्क्यू अभियान शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत और सूझबूझ के बाद टीम ने गाय को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। बाहर आते ही गाय को पानी पिलाया गया और उसकी प्राथमिक देखभाल की गई।

इन जांबाजों ने निभाई अहम भूमिका

रेस्क्यू अभियान में आशीष पटेल, संदीप मिश्रा, अशोक मौर्य, संतोष नामदेव, आकाश कोहली, परमानंद और सोनू पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम की तत्परता और समर्पण के कारण चार दिनों से फंसी गाय की जान बच सकी।

भूख-प्यास से कमजोर हुई, लेकिन सुरक्षित है गाय

रेस्क्यू टीम के अनुसार गाय को कोई गंभीर चोट नहीं आई है, लेकिन चार दिनों तक नाले में फंसे रहने और पर्याप्त भोजन-पानी नहीं मिलने के कारण वह काफी कमजोर हो गई थी। प्राथमिक उपचार और पानी पिलाने के बाद उसकी हालत में सुधार देखा गया।

बड़ा सवाल: आखिर पशुपालक कहां थे?

यह घटना पशुपालकों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि कोई गाय कई दिनों तक घर नहीं लौटती, तो उसकी तलाश करना मालिक का पहला कर्तव्य होना चाहिए। आखिर ऐसा कैसे हुआ कि गाय चार दिन तक नाले में फंसी रही और उसके मालिक को इसकी भनक तक नहीं लगी? यदि समय रहते उसकी खोज की जाती, तो वह चार दिनों तक इस पीड़ा से नहीं गुजरती।

 पशुपालन नहीं, जिम्मेदारी भी निभाना है आवश्यक

गाय पालना केवल दूध प्राप्त करने या धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके जीवन और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यह घटना बताती है कि जहां एक ओर कुछ पशुपालक अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं, वहीं एक संवेदनशील महिला और नगर निगम की रेस्क्यू टीम ने मानवता का ऐसा उदाहरण पेश किया है, जो समाज के लिए प्रेरणा बन सकता है। बेजुबान पशुओं की सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर पशुपालक और हर नागरिक की भी नैतिक जिम्मेदारी 

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