2 लाख से ज्यादा खर्च, फिर भी जिला बार का मतदान रद्द, उठे जवाबदेही के सवाल - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

Breaking

Tuesday, July 21, 2026

2 लाख से ज्यादा खर्च, फिर भी जिला बार का मतदान रद्द, उठे जवाबदेही के सवाल

 जबलपुर। जिला बार एसोसिएशन के चुनाव में मतदान रद्द होने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर अधिवक्ताओं के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। चुनाव संपन्न कराने के लिए व्यापक तैयारियां की गई थीं, प्रत्याशियों ने नामांकन शुल्क जमा किया, चुनावी व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये खर्च हुए, लेकिन मतदान निरस्त होने से पूरी प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। अब अधिवक्ता निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके।

चुनाव अधिकारी द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की हो जांच

अधिवक्ताओं का कहना है कि चुनाव अधिकारी द्वारा मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। ऐसे में सबसे पहले इन कैमरों की फुटेज की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि पूरी प्रक्रिया कैमरों में रिकॉर्ड हुई है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर विवाद की शुरुआत कहां से हुई, किस स्तर पर त्रुटि हुई और किन परिस्थितियों में मतदान रद्द करने की नौबत आई।

════════════════════════════════════╗

जिला अधिवक्ता संघ चुनाव विवाद: उठीं प्रमुख मांगें

════════════════════════════════════

🔹 मतदान निरस्त मामले की न्यायिक जांच कराई जाए।

🔹 दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई हो।

🔹 चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के खर्च की क्षतिपूर्ति की जाए।

🔹 यदि चुनाव समिति की लापरवाही सिद्ध होती है तो चुनाव पर हुए खर्च की राशि संबंधित जिम्मेदारों से वसूली जाए।

╚════════════════════════════

मतपत्र वितरण के दौरान अव्यवस्था से बढ़ा विवाद!

प्रत्यक्षदर्शी अधिवक्ताओं के अनुसार मतदान केंद्र पर मतपत्र वितरण के लिए केवल एक ही काउंटर बनाया गया था। अधिवक्ता अपनी बार की पहचान-पत्र (आईडी) और पर्ची दिखाने के बाद मतपत्र प्राप्त कर रहे थे। इसी दौरान दोनों प्रवेश द्वार खुले होने के कारण एक साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता काउंटर तक पहुंच गए, जिससे वहां भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन गई।

बताया जाता है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए चुनाव अधिकारी ने सभी को पीछे हटने और एक-एक करके आने के निर्देश दिए। इसके साथ ही एक प्रवेश द्वार भी बंद करा दिया गया। इस दौरान कुछ अधिवक्ताओं ने इसे लेकर नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि उन्हें मतदान प्रक्रिया से बाहर किया जा रहा है। इसके बाद मतदान केंद्र पर तनाव का माहौल बन गया और विवाद बढ़ता चला गया।

घटनास्थल पर मौजूद कुछ अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि उस समय मतपत्र वितरण की बेहतर व्यवस्था की जाती और भीड़ प्रबंधन प्रभावी ढंग से किया जाता, तो संभवतः स्थिति इतनी नहीं बिगड़ती। हालांकि, पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति चुनाव अधिकारी द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने बढ़ाए सवाल

मतदान के दौरान हुए घटनाक्रम के कई वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में कुछ युवा अधिवक्ता मतदान केंद्र पर हंगामा करते तथा टेबल पलटते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो की भी जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम का आधिकारिक परीक्षण आवश्यक है।

क्या छोटी त्रुटियों को सुधारा जा सकता था?

कुछ अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि कहीं प्रक्रिया संबंधी छोटी-मोटी कमियां थीं तो उन्हें मौके पर ही दूर किया जा सकता था। उनका कहना है कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा था और विवाद बढ़ने के बाद अचानक पूरी प्रक्रिया निरस्त कर देना कई सवाल खड़े करता है।

लाखों रुपये का खर्च, जवाबदेही तय हो

चुनाव प्रक्रिया में प्रत्याशियों द्वारा जमा किए गए नामांकन शुल्क तथा चुनावी व्यवस्थाओं पर करीब दो लाख रुपये से अधिक खर्च होने की चर्चा है। ऐसे में अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि चुनाव रद्द हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय होना भी आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।

सीनियर अधिवक्ताओं की भूमिका अहम

बार के कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि यह केवल चुनाव का मामला नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की गरिमा से जुड़ा विषय है। जिस प्रकार की घटनाएं सामने आई हैं, उन्हें देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ताओं को आगे आकर युवा अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। बार की पहचान हमेशा अनुशासन, गरिमा और कानून के सम्मान से रही है, इसलिए भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए संवाद, अनुशासन और सकारात्मक नेतृत्व की आवश्यकता है।

निष्पक्ष जांच से ही लौटेगा विश्वास

अधिवक्ताओं का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, सीसीटीवी फुटेज का परीक्षण, वायरल वीडियो का सत्यापन और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही सही निष्कर्ष सामने आएगा। यदि जांच पारदर्शी तरीके से होती है तो न केवल जिम्मेदारी तय होगी, बल्कि भविष्य में जिला बार एसोसिएशन के चुनाव और अधिक निष्पक्ष एवं विवादमुक्त तरीके से संपन्न कराए जा सकेंगे।

No comments: