नशे से दूरी है जरूरी' अभियान पर सवाल: शहर की शराब दुकानों के बाहर खुलेआम बन रहे अवैध आहते, पुलिस-आबकारी की चुप्पी से बढ़ रहे हालात - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Tuesday, July 21, 2026

नशे से दूरी है जरूरी' अभियान पर सवाल: शहर की शराब दुकानों के बाहर खुलेआम बन रहे अवैध आहते, पुलिस-आबकारी की चुप्पी से बढ़ रहे हालात

 एक तरफ नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान और कार्रवाई का दावा, दूसरी तरफ शराब दुकानों के बाहर सड़कों पर शराबखोरी, गांजा बिक्री और अवैध कारोबार से आमजन परेशान।



जबलपुर

मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 15 जुलाई से 30 जुलाई तक पूरे प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूल, कॉलेज, सार्वजनिक स्थानों और विभिन्न संस्थानों में लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। पुलिस अवैध नशे के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा भी कर रही है।

लेकिन संस्कारधानी जबलपुर की हकीकत इस अभियान की तस्वीर से बिल्कुल अलग दिखाई दे रही है। शहर की अधिकांश शराब दुकानों के बाहर शाम ढलते ही खुलेआम शराब पीने वालों का जमावड़ा लग जाता है। सड़कें अवैध आहते में तब्दील हो जाती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है और आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं और परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अभियान अपनी जगह, सड़कों पर खुली शराबखोरी अपनी जगह

शहर में कई शराब दुकानों के बाहर लोग सड़क और फुटपाथ पर बैठकर खुलेआम शराब पीते दिखाई देते हैं। शराब की बोतलें, डिस्पोजल ग्लास और चखने का सामान खुलेआम बिकता है। दुकानों के बाहर खड़े दोपहिया और चारपहिया वाहन सड़क तक फैल जाते हैं, जिससे आए दिन जाम की स्थिति बनती है।

रात के समय इन स्थानों से गुजरने वाले लोगों को विवाद और अभद्रता का सामना करना पड़ता है। कई महिलाओं का कहना है कि वे ऐसे इलाकों से अकेले निकलने से बचती हैं क्योंकि शराबियों का जमावड़ा भय का माहौल पैदा करता है।

इंदिरा मार्केट का नजारा, जहां से रोज गुजरते हैं जिम्मेदार अधिकारी

सबसे हैरानी की बात यह है कि इंदिरा मार्केट क्षेत्र, जहां से पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से गुजरते हैं, वहां भी शराब दुकान के बाहर सड़क और फुटपाथ पर खुलेआम शराब पीते लोग आसानी से देखे जा सकते हैं।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब यह दृश्य आम नागरिकों को साफ दिखाई देता है तो जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ती?

घमापुर क्षेत्र में गांजे का बढ़ता कारोबार

शहर में केवल शराब ही नहीं बल्कि गांजे का अवैध कारोबार भी तेजी से फैलने की चर्चा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घमापुर थाना क्षेत्र के शीतला माई, कुम्हार मोहल्ला और मंदिर के पीछे अब शराब के साथ-साथ गांजा भी खुलेआम बेचा जा रहा है।

बताया जाता है कि झामनदास चौक, जो घमापुर थाने से लगभग 50 मीटर की दूरी पर स्थित है, वहां भी अवैध गतिविधियां लंबे समय से संचालित होने की शिकायतें मिलती रही हैं। लोगों का कहना है कि पुलिस की नाक के नीचे यह सब होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती।

डिस्पोजल, चखना और पानी बेचने वालों की भी चांदी

शराब दुकानों के बाहर हर शाम अस्थायी बाजार सज जाता है। डिस्पोजल ग्लास, पानी की बोतलें, नमकीन, चखना और अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले बड़ी संख्या में पहुंच जाते हैं। इससे कुछ लोगों को रोजगार जरूर मिला है, लेकिन यही व्यवस्था शराब दुकानों के बाहर अवैध आहते जैसी स्थिति को बढ़ावा भी दे रही है।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी

स्थानीय लोगों के अनुसार शहर के कई क्षेत्रों में शराब दुकानों के बाहर रोजाना भीड़ जमा होती है। इनमें प्रमुख रूप से—

गोरखपुर थाना क्षेत्र , छोटी लाइन फाटक , मदन महल चौराहा , , , बलदेव बाग रानीताल भाजपा कार्यालय के सामने, दमोह नाका क्षेत्रीय बस स्टैंड, चेरीताल, चंडालभाटा, सूर्या,होटल मानस भवन रोड , पुराना बस स्टैंड पुलिस चौकी से चंद कदम दूरी पर तीन पत्ती कांचघर चौराहा

शाम होते ही इन स्थानों पर सड़क किनारे शराब पीते लोगों की भीड़ लग जाती है। कई बार यदि किसी वाहन का हल्का सा स्पर्श भी शराबियों से हो जाए तो विवाद और अभद्र व्यवहार की स्थिति बन जाती है। परिवार के साथ निकलने वाले लोग अक्सर अपमान सहकर चुपचाप वहां से निकलना ही बेहतर समझते हैं।

पुलिस और आबकारी के बीच जिम्मेदारी का खेल

जब नागरिक इस समस्या की शिकायत पुलिस से करते हैं तो मामला आबकारी विभाग का बताकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। वहीं आबकारी विभाग भी सीमित अधिकारों का हवाला देता है। परिणामस्वरूप शराब दुकानों के बाहर बने अवैध आहते और सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी की समस्या जस की तस बनी हुई है।

क्या  जन जागरण तक सिमट कर रह गया है यह अभियान ?

जब पूरे प्रदेश में "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान चलाया जा रहा है, तब क्या सार्वजनिक स्थानों पर खुलेआम शराब पीना, अवैध आहते संचालित होना और गांजे की बिक्री इस अभियान की गंभीरता पर सवाल नहीं खड़े करते? क्या सिर्फ बीड़ी ,सगरेट, या केवल जन जागरण तक सिमट कर रह गया है यह अभियान

शहरवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन वास्तव में नशे के खिलाफ अभियान को सफल बनाना चाहता है तो केवल जागरूकता कार्यक्रमों से काम नहीं चलेगा। शराब दुकानों के बाहर बनने वाले अवैध आहते, सार्वजनिक स्थानों पर शराबखोरी, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर भी सख्त और निरंतर कार्रवाई करनी होगी। तभी "नशे से दूरी है जरूरी" अभियान का उद्देश्य वास्तव में सार्थक हो सकेगा।

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