जबलपुर।
निजी स्कूलों द्वारा फीस और पाठ्य पुस्तकों के नाम पर कथित मोनोपॉली सिंडिकेट चलाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस बी.पी. शर्मा की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि मामला गंभीर आपराधिक साजिश की ओर संकेत करता है और प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं, इसलिए एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता।
अदालत ने स्कूल प्रबंधन, प्रिंसिपलों, बुक सेलर्स और प्रकाशकों द्वारा दायर कुल 13 याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि आरोपों की प्रकृति गंभीर है और इनका परीक्षण ट्रायल के दौरान ही संभव है।
दो साल पहले शुरू हुई कार्रवाई
करीब दो वर्ष पूर्व जबलपुर जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ओमती, बेलबाग, संजीवनी नगर, ग्वारीघाट और गोराबाजार थानों में एफआईआर दर्ज कराई थी। यह कार्रवाई तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना के निर्देश पर की गई थी।
क्या हैं मुख्य आरोप
तय सीमा से अधिक फीस वसूली
डुप्लीकेट ISBN वाली किताबों की बिक्री
अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य करना
किन-किन पर आरोप
मामले में जबलपुर और कटनी के कई मिशनरी स्कूलों के प्रिंसिपल और प्रबंधन से जुड़े लोग शामिल हैं। साथ ही “चिल्ड्रन्स बुक हाउस” के संचालक सूर्यप्रकाश वर्मा और शशांक श्रीवास्तव के नाम भी सामने आए हैं।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जो स्कूल प्रबंधन, बुक सेलर्स और पब्लिशर्स के बीच संगठित मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
अदालत के अनुसार, एक मोनोपोलिस्टिक सप्लाई चेन तैयार कर अभिभावकों पर दबाव बनाकर महंगी किताबें खरीदवाई गईं, जिससे अवैध लाभ कमाया गया।
कोर्ट ने साफ कहा कि यह केवल प्रशासनिक अनियमितता नहीं, बल्कि आपराधिक षड्यंत्र का मामला है।
जमानत के बाद भी नहीं मिली राहत
हालांकि आरोपियों को पहले हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन एफआईआर निरस्त कराने की उनकी मांग को अदालत ने खारिज कर दिया। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता दिनेश प्रसाद पटेल ने कार्रवाई को वैध बताया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।
अब आगे क्या
मामला ट्रायल कोर्ट में चलेगा
हाईकोर्ट ने आदेश की प्रति संबंधित ट्रायल कोर्ट और पुलिस अधीक्षक, जबलपुर को भेजने के निर्देश दिए
पेरेंट्स एसोसिएशन की प्रतिक्रिया
जबलपुर पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस आदेश से अभिभावकों का न्यायपालिका पर विश्वास और मजबूत हुआ है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने कहा कि लंबे समय से अभिभावक निजी स्कूलों की मनमानी फीस, पुस्तक माफिया और एकाधिकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, जिस पर अब न्यायालय ने गंभीरता दिखाई है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला अभिभावकों की समस्याओं को सही ठहराता है और उनके अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि अभिभावकों के हित में उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा और प्रशासन से न्यायालय के निर्देशों के पालन की अपेक्षा की है।


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