जबलपुर।
देश के अलग-अलग राज्यों में ट्रेनों को निशाना बनाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक शातिर अंतरराज्यीय अपराधी को आरपीएफ ने आखिरकार दबोच लिया। फिल्मी अंदाज में भागते हुए आरोपी ने सिहोरा स्टेशन के पास एक तालाब में छलांग लगा दी, लेकिन करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस ने उसे बाहर निकालकर गिरफ्तार कर लिया।
सिहोरा में महिला का बैग चुराने के दौरान पकड़ा गया
आरपीएफ इंस्पेक्टर राजीव खरब के अनुसार, 6 अप्रैल की सुबह रीवा-इतवारी एक्सप्रेस जब सिहोरा पहुंची, उसी दौरान आरोपी ने एक महिला यात्री का पर्स और बैग चोरी करने की कोशिश की। महिला के जाग जाने पर वह घबराकर ट्रेन से कूदकर भागा और खुद को बचाने के लिए पास स्थित तालाब में उतर गया। सूचना मिलते ही आरपीएफ और स्थानीय पुलिस ने मौके पर घेराबंदी कर दी और गोताखोरों की मदद से घंटों की मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
कड़ाई से पूछताछ में हुआ खुलासा
पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उसका रिकॉर्ड खंगाला गया तो उसकी असली पहचान हरविंदर सिंह, निवासी बिजनौर (उत्तर प्रदेश) के रूप में सामने आई। पुलिस के मुताबिक, हरविंदर सिंह पर देश के विभिन्न हिस्सों—विशाखापट्टनम, केरल, मुंबई और मध्यप्रदेश—में चोरी के कुल 21 मामले दर्ज हैं। विशाखापट्टनम में उसने हीरे और सोने की करीब 70 लाख रुपये की चोरी को अंजाम दिया था।
अकेला ही पूरा ‘गिरोह’
जांच में यह भी सामने आया कि हरविंदर किसी गैंग का हिस्सा नहीं, बल्कि खुद ही एक पूरा ‘गिरोह’ है। वह अकेले ही पूरी वारदात को अंजाम देता था, जिससे पुलिस के लिए उसे ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता था। वर्ष 2017 के पुराने रिकॉर्ड खंगालने पर उसकी तस्वीर और आपराधिक इतिहास की पुष्टि हुई।
तकनीक से बचने का अपनाता था अनोखा तरीका
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी सीसीटीएनएस और अन्य ऑनलाइन ट्रैकिंग सिस्टम से बचने के लिए पीआरएस काउंटर से टिकट नहीं लेता था। वह सेकंड एसी कोच के वॉशरूम में छिपकर यात्रा करता और मौका मिलते ही यात्रियों के कीमती सामान पर हाथ साफ कर देता था।
इसके अलावा, आरोपी नोकिया का कीपैड मोबाइल फोन इस्तेमाल करता था और लगातार सिम कार्ड बदलता रहता था, ताकि उसकी लोकेशन ट्रेस न हो सके और पुलिस की निगरानी से बचा जा सके।
फिलहाल आरपीएफ आरोपी से अन्य वारदातों के संबंध में पूछताछ कर रही है और उससे जुड़े अन्य मामलों की कड़ियां भी खंगाली जा रही हैं।

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