जबलपुर: बरगी थाना क्षेत्र में मुख्य नहर टूटने से हड़कंप, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Sunday, February 1, 2026

जबलपुर: बरगी थाना क्षेत्र में मुख्य नहर टूटने से हड़कंप, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न

 



प्रथम टुडे 

जबलपुर जिले के बरगी थाना क्षेत्र में बरगी बांध से निकलने वाली मुख्य नहर सगड़ा  के अचानक टूट जाने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया वहीं नहर का पानी नरई नाला भी ओवरफ्लो होकर बह रहा था एवं इसका पानी भी खेतों में घुसा। नहर टूटते ही तेज बहाव के साथ पानी आसपास के खेतों में घुस गया, जिससे खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। इस घटना से क्षेत्र के सैकड़ों किसान प्रभावित हुए हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह नहर लंबे समय से जर्जर अवस्था में थी। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने नहर की हालत को लेकर कई बार सिंचाई विभाग और संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दी थीं, लेकिन समय रहते मरम्मत या सुधार कार्य नहीं कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने पहले चेतावनियों को गंभीरता से लिया होता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।

नहर टूटने के बाद खेतों में भरे पानी से गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों को भारी क्षति पहुंची है। कई किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है। किसानों का कहना है कि वे पहले ही प्राकृतिक आपदाओं और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह लापरवाही उनके लिए दोहरी मार साबित हुई है।

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस और सिंचाई विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और हालात का निरीक्षण किया। प्रशासन ने तत्काल पानी के बहाव को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए और एहतियातन आसपास के क्षेत्रों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि की सूचना नहीं है।

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराया जा रहा है और फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं किसानों ने मांग की है कि नहर के रखरखाव में हुई लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र व उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

इस घटना ने एक बार फिर जिले की सिंचाई व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन केवल नुकसान का आंकलन कर औपचारिकता निभाता है या भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस और स्थायी कदम उठाता है।

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