जिला अधिवक्ता संघ अध्यक्ष मनीष मिश्रा बोले— अग्निशमन यंत्र फेल, वाटर पंप की भी नहीं हुई टेस्टिंग; भविष्य में हादसा हुआ तो प्रशासन होगा जिम्मेदार
जबलपुर। जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर के गेट नंबर-2 स्थित पार्किंग में खड़ी एक अर्टिगा कार में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि समय रहते कार से निकलते धुएं पर एक अधिवक्ता की नजर पड़ गई और उनकी सतर्कता से फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। अग्निशमन दल ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। लेकिन इस घटना ने न्यायालय परिसर में आग से बचाव के लिए की गई व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने इसे बड़ी लापरवाही बताते हुए अग्निशमन यंत्रों और वाटर पंप की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डिक्की से निकल रहा था धुआं, देखते ही देखते कार में भड़की आग
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जिला न्यायालय की गेट नंबर-2 पार्किंग में एक अर्टिगा कार खड़ी थी। इसी दौरान वहां पहुंचे एक अधिवक्ता ने कार की डिक्की से धुआं निकलते देखा। उन्होंने तत्काल आवाज लगाकर कार चालक को बुलाया। चालक डिक्की खोलने में हिचकिचा रहा था, लेकिन जब डिक्की खोली गई तो उसमें से तेजी से धुआं निकलने लगा। कुछ ही देर में कार में आग लग गई और मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
अधिवक्ताओं की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
कार में आग लगने की जानकारी मिलते ही मौके पर मौजूद अधिवक्ताओं ने तत्काल फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सूचना मिलते ही अग्निशमन दल मौके पर पहुंचा और आग पर काबू पाया। समय रहते आग का पता चलने और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से स्थिति को बिगड़ने से रोक लिया गया।
हालांकि, इस घटना के दौरान न्यायालय परिसर में लगे अग्निशमन यंत्रों की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठे। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, आग बुझाने के लिए लगाए गए अग्निशमन यंत्र प्रभावी साबित नहीं हुए। ऐसे में सवाल यह है कि जब परिसर में आग से बचाव के उपकरण लगाए गए हैं, तो आपात स्थिति में वे काम क्यों नहीं आए?
मनीष मिश्रा का सवाल— अग्निशमन यंत्र एक्सपायर तो नहीं हो गए थे?
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने इस घटना को बड़ी लापरवाही बताते हुए अग्निशमन यंत्रों की स्थिति की जांच कराने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि परिसर में लगे अग्निशमन यंत्र कहीं एक्सपायर तो नहीं हो गए थे या उनकी देखरेख में लापरवाही बरती जा रही थी।
न्यायालय परिसर जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर अग्निशमन उपकरणों का चालू हालत में रहना बेहद जरूरी है। यदि आग लगने जैसी आपात स्थिति में यही उपकरण काम नहीं आते, तो उनका परिसर में लगा होना किस काम का? मिश्रा ने इस पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारियों का निर्धारण करने की आवश्यकता जताई है।
वाटर पंप भी फेल, नियमित टेस्टिंग नहीं होने का आरोप
मनीष मिश्रा ने अग्नि सुरक्षा के लिए परिसर में लगाए गए वाटर पंप की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, आग बुझाने के लिए लगाए गए वाटर पंप भी पूरी तरह फेल रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पंपों की नियमित टेस्टिंग नहीं होती, जबकि सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए समय-समय पर उनकी जांच और परीक्षण होना चाहिए।
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि यदि किसी बड़े हिस्से में आग फैल जाती, तो क्या परिसर में लगे वाटर पंप और अन्य अग्निशमन उपकरण आग पर काबू पाने में सक्षम होते? इन उपकरणों की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए तकनीकी जांच और नियमित रखरखाव के रिकॉर्ड की पड़ताल जरूरी है।
मनीष मिश्रा की चेतावनी— भविष्य में हादसा हुआ तो प्रशासन होगा जिम्मेदार
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अग्नि सुरक्षा के मामले में इस तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में ऐसी कोई घटना होती है या कोई बड़ी दुर्घटना घटती है, तो उसकी जवाबदेही प्रशासन की होगी।
उनका कहना है कि सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच, समय पर टेस्टिंग और उनकी कार्यशीलता सुनिश्चित करना संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व है। घटना के बाद केवल आग बुझा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन कमियों को दूर करना भी जरूरी है, जिनके कारण किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
पार्किंग में सैकड़ों वाहन, लापरवाही पड़ सकती है भारी
जिला न्यायालय परिसर की पार्किंग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े रहते हैं। ऐसे में यदि कार में लगी आग पर समय रहते ध्यान नहीं दिया जाता, तो आग आसपास खड़े वाहनों तक फैल सकती थी। इससे वाहनों को भारी नुकसान पहुंचने के साथ-साथ न्यायालय परिसर में मौजूद अधिवक्ताओं, पक्षकारों और अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्नि सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों पर होना पर्याप्त नहीं है। उपकरणों का नियमित निरीक्षण, वाटर पंप की टेस्टिंग और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी भी उतनी ही आवश्यक है।
अब जांच और जवाबदेही तय करने की जरूरत
जिला न्यायालय परिसर में हुई इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अग्निशमन यंत्रों और वाटर पंप की नियमित जांच आखिर क्यों नहीं हुई, यदि वास्तव में उनकी टेस्टिंग नहीं की जा रही थी? क्या उपकरणों के रखरखाव की जिम्मेदारी निभाई जा रही थी? और यदि आग किसी बड़े स्तर पर फैल जाती, तो उससे निपटने के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम थे?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच और तकनीकी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने इस मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बनने देने की चेतावनी दी है।


No comments:
Post a Comment