प्रैक्टिकल के दौरान कक्षा चौथी के छात्र अथर्व के साथ हुई थी घटना, परिजनों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने गठित किया जांच दल
, जबलपुर। सत्य प्रकाश पब्लिक स्कूल, पॉलीपाथर में कक्षा चौथी के एक छात्र का प्रैक्टिकल के दौरान हाथ झुलसने का मामला अब जांच के दायरे में आ गया है। छात्र के परिजनों द्वारा स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए जाने के बाद जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग में शिकायत की गई थी। कार्रवाई नहीं होने पर परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन का सहारा लिया। इसके बाद शिक्षा विभाग से मामले को लेकर जानकारी मांगी गई और तत्काल एक जांच दल गठित किया गया है।
11 जुलाई को प्रैक्टिकल के दौरान हुआ हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 जुलाई को सत्य प्रकाश पब्लिक स्कूल में कक्षा चौथी के छात्रों का प्रैक्टिकल कराया जा रहा था। इसी दौरान छात्र अथर्व का हाथ गर्म पदार्थ अथवा प्रयोग के दौरान झुलस गया। घटना में छात्र के हाथ पर गंभीर जलने की बात सामने आई है। घटना के बाद से ही परिजन इस बात को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि इतनी कम उम्र के बच्चों के प्रैक्टिकल के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
छुट्टी तक छात्र को स्कूल में बैठाए रखने का आरोप
छात्र के परिजनों का आरोप है कि हाथ झुलसने के बाद भी अथर्व को स्कूल की छुट्टी होने तक स्कूल में ही बैठाकर रखा गया। परिजनों के अनुसार, ऐसी स्थिति में तत्काल अभिभावकों को घटना की सूचना दी जानी चाहिए थी, ताकि बच्चे को समय रहते चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
परिजनों का यह भी कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी किस प्रकार और कितनी देर बाद दी गई, इसकी भी जांच होना जरूरी है। इसी बिंदु को लेकर अब शिक्षा विभाग की जांच में स्कूल प्रबंधन की भूमिका और घटना के बाद उठाए गए कदमों को भी देखा जा सकता है।
स्कूल प्रबंधन से बातचीत को लेकर भी उठे सवाल
परिजनों ने स्कूल प्रबंधन से घटना को लेकर जवाब मांगने का प्रयास किया। उनका आरोप है कि जब वे मामले को लेकर स्कूल पहुंचे तो प्राचार्य ने उनसे अपेक्षित तरीके से बातचीत नहीं की। इसके बाद उन्होंने स्कूल के डायरेक्टर से भी घटना और बच्चों से प्रैक्टिकल कराने के नियमों को लेकर सवाल किए।
परिजनों के अनुसार, उन्होंने यह जानना चाहा था कि क्या कक्षा चौथी जैसे छोटे बच्चों से इस प्रकार के प्रैक्टिकल कराए जाने का कोई निर्धारित प्रोटोकॉल है और यदि है तो उसमें बच्चों की सुरक्षा को लेकर क्या प्रावधान हैं। आरोप है कि इस सवाल पर डायरेक्टर नाराज हो गए और कथित तौर पर परिजनों से अभद्र तरीके से बात की गई। परिजनों का दावा है कि उन्हें कथित तौर पर यह भी कहा गया कि “आपको क्या मालूम कि नियम क्या है” और “जाइए, आपको जो करना हो कर लीजिए।”
शिकायत के बाद अब शिक्षा विभाग की जांच
मामले को लेकर परिजनों ने पहले जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग में शिकायत की थी। जब उन्हें अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद संबंधित विभाग से मामले की जानकारी मांगी गई और शिक्षा विभाग ने जांच के लिए टीम गठित कर दी।
अब जांच समिति द्वारा घटना के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। इसमें प्रैक्टिकल के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था, छात्र के हाथ झुलसने की परिस्थितियां, घटना के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा उठाए गए कदम, अभिभावकों को सूचना देने की प्रक्रिया तथा बच्चों की उम्र के अनुसार प्रैक्टिकल कराने के नियमों जैसे बिंदुओं को शामिल किया जा सकता है।
जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक स्थिति
फिलहाल इस पूरे मामले में परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं। जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किस परिस्थिति में हुई और इसमें स्कूल प्रबंधन या संबंधित स्टाफ की कोई लापरवाही थी या नहीं।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा सबसे अहम जिम्मेदारी है। ऐसे में प्रैक्टिकल के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन और किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तत्काल अभिभावकों को सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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