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Friday, July 10, 2026

हाई कोर्ट में बंदी को छुड़ाने पहुंचे 'आतंकवादी', मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने किया गिरफ्तार

 एक्टिंग चीफ जस्टिस की मौजूदगी में हाई कोर्ट जबलपुर में हाई-लेवल मॉक ड्रिल, बम निरोधक दस्ते ने संदिग्ध विस्फोटक भी किया निष्क्रिय


जबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट परिसर में शुक्रवार को उस समय सनसनी फैल गई, जब सूचना मिली कि कुछ आतंकवादी एक बंदी को छुड़ाने के इरादे से हाई कोर्ट परिसर में घुस आए हैं। सूचना मिलते ही पूरे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस, विशेष सुरक्षा बल, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और एंबुलेंस की टीमें तत्काल मौके पर पहुंच गईं। कुछ ही मिनटों में हाई कोर्ट परिसर को चारों ओर से घेर लिया गया और सभी प्रवेश एवं निकास मार्गों पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से परिसर में मौजूद अधिवक्ता, कर्मचारी और आम नागरिक कुछ देर के लिए दहशत में आ गए।

बंदी तक पहुंचने से पहले ही घेर लिए गए आतंकवादी

मॉक ड्रिल के अनुसार आतंकवादियों का उद्देश्य हाई कोर्ट लाए गए एक बंदी को छुड़ाना था। जैसे ही सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक लगी, जवानों ने पूरे परिसर में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया। सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को घेरते हुए उन्हें बंदी तक पहुंचने से पहले ही रोक लिया।

मुठभेड़ और हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट का किया गया प्रदर्शन

ऑपरेशन के दौरान आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ की स्थिति बनाई गई। जवानों ने अत्याधुनिक हथियारों के साथ कार्रवाई करते हुए हैंड-टू-हैंड कॉम्बैट (करीबी संघर्ष) का भी प्रदर्शन किया। कुछ देर चले इस ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों ने सभी आतंकवादियों को काबू कर गिरफ्तार कर लिया। पूरे घटनाक्रम को इतनी वास्तविकता के साथ प्रस्तुत किया गया कि मौजूद लोगों को कुछ समय तक यह वास्तविक घटना ही लगी।

बम स्क्वायड ने खोजकर निष्क्रिय किया संदिग्ध विस्फोटक

मॉक ड्रिल के अगले चरण में परिसर में संदिग्ध बम रखे होने की सूचना दी गई। इसके बाद बम निरोधक दस्ते ने विशेष उपकरणों की सहायता से पूरे क्षेत्र की तलाशी ली। संदिग्ध विस्फोटक का पता लगाकर उसे सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया गया। पूरे समय मेडिकल टीम और एंबुलेंस भी अलर्ट मोड पर तैनात रही।

एक्टिंग चीफ जस्टिस की मौजूदगी में परखी गई सुरक्षा व्यवस्था

कुछ देर बाद अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी कार्रवाई एक हाई-लेवल मॉक ड्रिल का हिस्सा थी। मॉक ड्रिल एक्टिंग चीफ जस्टिस की मौजूदगी एवं निगरानी में आयोजित की गई। इसका उद्देश्य आतंकवादी हमले, बंदी को छुड़ाने के प्रयास और बम की सूचना जैसी आपात परिस्थितियों में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय, त्वरित कार्रवाई और सुरक्षा तैयारियों का परीक्षण करना था।

वास्तविक घटना नहीं, सुरक्षा व्यवस्था का अभ्यास

अधिकारियों ने बताया कि यह केवल सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी परखने के लिए आयोजित पूर्व नियोजित अभ्यास था। इस तरह की मॉक ड्रिल से सुरक्षा व्यवस्था की कमियों की पहचान होती है और भविष्य में किसी भी वास्तविक आपात स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को और अधिक सक्षम बनाया जाता है। मॉक ड्रिल सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद हाई कोर्ट परिसर में सामान्य गतिविधियां फिर से शुरू हो गईं।

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