जबलपुर। जबलपुर जिला बार एसोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद को लेकर चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। मतदान में अभी एक दिन का समय शेष है, लेकिन अधिवक्ताओं के बीच हो रही चर्चाओं और चुनावी माहौल को देखकर यह माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदार मनीष मिश्रा इस बार सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं। युवा और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का उन्हें लगातार समर्थन मिलता नजर आ रहा है।
दो बार सचिव रहते बनाया मजबूत जनाधार
मनीष मिश्रा जिला बार एसोसिएशन के दो बार सचिव रह चुके हैं। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने अधिवक्ताओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और बार की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए। यही कारण है कि उन्होंने अधिवक्ताओं के बीच अपनी अलग पहचान बनाई और आज भी उनका जनाधार मजबूत माना जा रहा है।
पिछले चुनाव में तोड़े थे सभी समीकरण
पिछले जिला बार चुनाव में मनीष मिश्रा ने सभी चुनावी समीकरणों को ध्वस्त करते हुए भारी बहुमत से जीत दर्ज की थी। उस जीत के बाद से उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है। इस बार भी चुनावी माहौल को देखकर अधिवक्ताओं के बीच उनकी स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है।
युवा और वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मिल रहा साथ
चुनावी माहौल में सबसे खास बात यह सामने आ रही है कि मनीष मिश्रा को केवल युवा अधिवक्ताओं का ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिवक्ताओं का भी भरपूर स्नेह और समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। बार परिसर में हो रही चर्चाओं में भी उनकी स्वीकार्यता अन्य प्रत्याशियों की तुलना में अधिक बताई जा रही है।
हंसमुख और सरल व्यवहार बना बड़ी ताकत
मनीष मिश्रा का सरल, सहज और मिलनसार स्वभाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है। अधिवक्ताओं का कहना है कि वे हमेशा सभी के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं और किसी भी वर्ग के अधिवक्ता के साथ समान व्यवहार करते हैं। यही कारण है कि उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती रही है।
अधिवक्ताओं की समस्याओं को लेकर रहे सक्रिय
अपने पिछले कार्यकाल में मनीष मिश्रा अधिवक्ताओं की समस्याओं को लेकर लगातार संघर्ष करते रहे। चाहे बार की मूलभूत सुविधाओं का विषय हो या अधिवक्ताओं के हितों से जुड़े मुद्दे, उन्होंने हर विषय को गंभीरता से उठाने का प्रयास किया। इसी कार्यशैली का लाभ उन्हें वर्तमान चुनाव में मिलता दिखाई दे रहा है।
हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं का भी मिल रहा आशीर्वाद
चुनावी चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि मनीष मिश्रा को हाई कोर्ट से जुड़े अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं का भी समर्थन और आशीर्वाद प्राप्त है। इससे उनकी दावेदारी और अधिक मजबूत होती नजर आ रही है।
गुटबाजी से दूरी ने बढ़ाया विश्वास
मनीष मिश्रा की पहचान ऐसे अधिवक्ता के रूप में रही है, जिन्होंने हमेशा गुटबाजी से दूरी बनाए रखी। वे सभी अधिवक्ताओं को साथ लेकर चलने की राजनीति में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि विभिन्न वर्गों के अधिवक्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता अधिक दिखाई दे रही है।
नरेंद्र जैन भी मैदान में, लेकिन मुकाबले में मनीष मिश्रा भारी
अध्यक्ष पद की दौड़ में पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र जैन भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालांकि चुनावी माहौल और अधिवक्ताओं के बीच हो रही चर्चाओं के अनुसार मुकाबले में मनीष मिश्रा फिलहाल अधिक मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। कई अधिवक्ताओं का मानना है कि यदि मतदान तक यही माहौल बना रहा तो मनीष मिश्रा की जीत की संभावना सबसे प्रबल रहेगी।
मतदान से पहले मनीष मिश्रा की बढ़त की चर्चा
मतदान से ठीक पहले बार परिसर में जिस प्रकार का चुनावी माहौल दिखाई दे रहा है, उसमें बड़ी संख्या में अधिवक्ता मनीष मिश्रा की बढ़त की चर्चा कर रहे हैं। युवा ऊर्जा, वरिष्ठों का विश्वास, पूर्व कार्यकाल का अनुभव और सहज व्यवहार उनके पक्ष में मजबूत माहौल बनाते दिखाई दे रहे हैं। अब अंतिम फैसला मतदान और मतगणना के बाद ही सामने आएगा, लेकिन वर्तमान चुनावी माहौल में उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।

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