बच्ची से कथित दुर्व्यवहार के बाद शिक्षा विभाग सख्त, डीपीसी ने कलेक्टर को मान्यता निलंबन का प्रतिवेदन भेजने की बात कही; स्कूल की अन्य शाखाओं की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल।
प्रथम टुडे | विशेष संवाददाता | जबलपुर
मासूम के साथ कथित अन्याय पर सख्त हुआ शिक्षा विभाग
चार वर्षीय मासूम छात्रा के साथ कथित प्रताड़ना और उसके बाद स्कूल छोड़ने को मजबूर होने का मामला अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। जिला शिक्षा विभाग ने पूरे प्रकरण को गंभीर मानते हुए स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आवश्यकता हुई तो संबंधित स्कूल की मान्यता निलंबित करने की अनुशंसा कलेक्टर को भेजी जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि बच्चों के सम्मान और सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जांच में सामने आए कई गंभीर तथ्य
जानकारी के अनुसार 10 जुलाई को जनसुनवाई में छात्रा की मां ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कांचघर स्थित 4 सिस्टर स्कूल में उसकी बेटी के साथ अनुचित व्यवहार किया गया और बाद में उसे स्कूल से निकाल दिया गया। कलेक्टर के निर्देश पर जिला परियोजना समन्वयक योगेश शर्मा ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की। समिति ने छात्रा की मां, स्कूल प्रबंधन तथा अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए। जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए जिन्हें शिक्षा विभाग ने गंभीर माना है। हालांकि जातिगत अपमान का आरोप स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं हुआ, लेकिन बच्ची के प्रति की गई कथित टिप्पणियों और व्यवहार को अनुचित माना गया है।
'ऐसी घटना दोबारा न हो, इसलिए बनेगी नजीर'
जिला परियोजना समन्वयक का कहना है कि यदि किसी मासूम बच्ची के साथ इस तरह की स्थिति पैदा होती है तो इसे सामान्य घटना मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। पूरे मामले का प्रतिवेदन कलेक्टर को भेजा जाएगा और विभाग का अभिमत रहेगा कि स्कूल के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर विचार किया जाए। यदि ऐसा होता है तो यह प्रदेश के निजी स्कूलों के लिए एक बड़ी नजीर साबित हो सकती है।
पीड़ित मां का संकल्प—'बेटी को बेहतर माहौल में पढ़ाऊंगी'
अपनी बच्ची के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही मां का कहना है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयों का सामना करना पड़े, वह बेटी की शिक्षा और सम्मान से समझौता नहीं करेगी। उनका कहना है कि यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई होती है तो भविष्य में किसी अन्य मासूम को ऐसी पीड़ा नहीं झेलनी पड़ेगी।
अब सवाल सिर्फ एक शाखा का नहीं, पूरे नेटवर्क का
इस मामले के सामने आने के बाद स्कूल की अन्य शाखाओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ग्वारीघाट रोड स्थित इंद्रपुरी कॉलोनी की शाखा अत्यंत सीमित परिसर में संचालित हो रही है, जहां बच्चों के खेलने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। वहीं रामपुर छापर क्षेत्र में निर्माणाधीन नई शाखा को लेकर भी इसी प्रकार की व्यवस्थागत कमियों की चर्चा है।
क्या रसूख के दम पर मिल रही मंजूरी?
शहर में चर्चा है कि स्कूल संचालक प्रभाव और रसूख के दम पर लगातार संस्थानों का विस्तार कर रहा है। यदि यह सही है तो यह केवल एक स्कूल का नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता का भी सवाल है। ऐसे में जरूरत है कि केवल एक शिकायत तक जांच सीमित न रहे, बल्कि संबंधित संस्था की सभी शाखाओं, भवनों, खेल मैदान, सुरक्षा मानकों, मान्यता की शर्तों और बच्चों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।

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