मुख्य बाजार में बाल-बाल बची सैकड़ों जानें, नगर निगम की लापरवाही पर उठे सवाल; यातायात डीएसपी संतोष शुक्ला ने तत्काल संभाला मोर्चा
जबलपुर। शहर के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल बड़ा फव्वारा में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एक तीन मंजिला जर्जर भवन अचानक भरभराकर गिर पड़ा। गनीमत रही कि मंगलवार होने के कारण क्षेत्र का साप्ताहिक अवकाश था और अधिकांश दुकानें बंद थीं। यही वजह रही कि इस बड़ी दुर्घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह हादसा किसी सामान्य कारोबारी दिन या शादी के सीजन की भीड़भाड़ के दौरान हुआ होता तो बड़ी संख्या में लोग इसकी चपेट में आ सकते थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भवन गिरते ही पूरे क्षेत्र में धूल का गुबार छा गया और तेज धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। सूचना मिलते ही पुलिस बल सबसे पहले मौके पर पहुंचा और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित कराया। इसके बाद नगर निगम प्रशासन अपने अमले और जेसीबी मशीनों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा, लेकिन मुख्य मार्ग होने और भीड़भाड़ की स्थिति के कारण राहत कार्य शुरू करने में प्रारंभिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
यातायात डीएसपी संतोष शुक्ला ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही यातायात डीएसपी संतोष शुक्ला तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बैरिकेडिंग कर मुख्य मार्ग का यातायात डायवर्ट कराया। साथ ही आसपास मौजूद ठेला संचालकों, राहगीरों और अन्य लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटवाया, जिससे नगर निगम की जेसीबी और राहत दल को घटनास्थल तक पहुंचने में आसानी हुई। उनकी त्वरित कार्रवाई के चलते स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई और किसी अन्य अप्रिय घटना की आशंका भी टल गई। र्चा
घटना की सूचना मिलते ही यातायात डीएसपी संतोष शुक्ला तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने सबसे पहले सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बैरिकेडिंग कर मुख्य मार्ग का यातायात डायवर्ट कराया। साथ ही आसपास मौजूद ठेला संचालकों, राहगीरों और अन्य लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटवाया, जिससे नगर निगम की जेसीबी और राहत दल को घटनास्थल तक पहुंचने में आसानी हुई। उनकी त्वरित कार्रवाई के चलते स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई और किसी अन्य अप्रिय घटना की आशंका भी टल गई।
नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। बड़ा फव्वारा जबलपुर का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। यहीं से शहर के प्रमुख धार्मिक चल समारोह, जुलूस और अन्य महत्वपूर्ण आयोजन भी निकलते हैं। इसके बावजूद क्षेत्र में कई ऐसे भवन आज भी खड़े हैं, जो वर्षों से जर्जर अवस्था में हैं और किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम को इन जर्जर भवनों की जानकारी होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। बरसात के मौसम में ऐसे भवन और अधिक कमजोर हो जाते हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से न तो नियमित सर्वे किया जाता है और न ही खतरे वाले भवनों को सुरक्षित तरीके से खाली कराने या हटाने की गंभीर पहल दिखाई देती है।
'हनुमान जी ने बचा लिया' कह रहे क्षेत्रवासी
घटना के बाद क्षेत्र में मौजूद लोगों का कहना था कि मंगलवार होने और हनुमान जी के दिन यह हादसा होने के बावजूद किसी की जान नहीं गई, जिसे वे ईश्वर की कृपा मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि आज बाजार खुला होता, नीचे स्थित साड़ी शोरूम में ग्राहक मौजूद होते और सड़क पर सामान्य दिनों जैसी भीड़ होती तो यह हादसा भयावह रूप ले सकता था।
जर्जर भवनों के नाम पर भी उठ रहे सवाल
शहर में लंबे समय से यह चर्चा भी होती रही है कि कुछ मामलों में जर्जर भवन घोषित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठते हैं। नागरिकों का आरोप है कि कहीं वास्तविक रूप से खतरनाक भवनों पर कार्रवाई नहीं होती, तो कहीं अन्य मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी सामने आते हैं। ऐसे में आवश्यकता इस बात की है कि नगर निगम पूरी पारदर्शिता के साथ शहर के सभी जर्जर भवनों का सर्वे कर वास्तविक रूप से खतरनाक इमारतों पर तत्काल कार्रवाई करे।
अबशं निगाहें नगर निगम की अगली कार्रवाई पर
हर बड़ी घटना के बाद कार्रवाई और सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। बड़ा फव्वारा की यह घटना नगर निगम के लिए चेतावनी है कि यदि समय रहते शहर के अन्य जर्जर भवनों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित नहीं कराया गया तो भविष्य में किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
बरसात का मौसम शुरू हो चुका है और शहर के कई प्रमुख बाजारों में वर्षों पुराने जर्जर भवन अब भी लोगों के सिर पर खतरे की तरह खड़े हैं। मंगलवार को तो संयोगवश बड़ा हादसा टल गया, लेकिन अगली बार इतनी किस्मत साथ दे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। अब देखना यह होगा कि नगर निगम इस घटना से सबक लेकर ठोस कार्रवाई करता है या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।

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