जबलपुर में शराब दुकानों पर ओवररेटिंग का खेल बेखौफ, वायरल वीडियो से खुली पोल; आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
जबलपुर, प्रथम टुडे। शहर की शराब दुकानों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने का कथित खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आने के बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं देने से शराब दुकानों के संचालकों और कर्मचारियों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।
बीती रात सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने पूरे मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि 178 रुपये एमआरपी वाले शराब के क्वार्टर के बदले ग्राहक से 210 रुपये वसूले जा रहे हैं। जब ग्राहक निर्धारित मूल्य से अधिक रकम लेने पर आपत्ति जताता है तो दुकान का कर्मचारी बेखौफ अंदाज में कहता सुनाई देता है— "जहां शिकायत करनी है कर दो, हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा।"
बताया जा रहा है कि यह वीडियो चंडालभाटा स्थित शराब दुकान का है। वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर शिकायतों के बावजूद ओवररेटिंग पर लगाम क्यों नहीं लग पा रही है।
प्रथम टुडे पहले भी उठा चुका है मुद्दा
प्रथम टुडे लगातार शराब दुकानों पर हो रही ओवररेटिंग और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाता रहा है। शहर में लगातार यह चर्चा बनी हुई है कि यदि हर बार शिकायतें होती हैं, वीडियो सामने आते हैं और फिर भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिखता, तो इसके पीछे कारण क्या हैं? लोग आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
"फिर एमआरपी लिखने का मतलब क्या?"
शराब खरीदने वाले कई उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि लगभग हर दुकान पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत ही वसूली जानी है और शिकायत के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ता, तो फिर बोतलों और दुकानों पर एमआरपी लिखने का औचित्य क्या रह जाता है? लोगों का कहना है कि यदि व्यवस्था यही है तो संबंधित विभाग को स्पष्ट कर देना चाहिए कि शराब निर्धारित मूल्य पर नहीं, बल्कि ओवररेटिंग पर ही बिकेगी। यह आम उपभोक्ताओं की नाराजगी को दर्शाता है।
सिंडिकेट व्यवस्था के बाद और बढ़ीं चर्चाएं
शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि सिंडिकेट व्यवस्था लागू होने के बाद शराब कारोबार में मनमानी और ओवररेटिंग की शिकायतें बढ़ी हैं। लोगों का आरोप है कि इसी कारण शराब माफियाओं के हौसले पहले से ज्यादा बढ़े हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रहे वीडियो और शिकायतें पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जरूर कर रही हैं।
पहले भी हो चुके हैं विवाद
इससे पहले रांझी के मोहनिया और इंदिरा मार्केट स्थित शराब दुकानों पर भी ओवररेटिंग को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। कई मामलों में ग्राहकों के साथ अभद्रता और मारपीट तक के आरोप लगे। इसके बावजूद यदि हालात नहीं बदल रहे हैं तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जिम्मेदार विभाग अवैध वसूली पर अंकुश लगाने में क्यों असफल दिखाई दे रहा है।
अब निगाहें आबकारी विभाग पर
वायरल वीडियो के बाद शहरवासियों की नजरें अब आबकारी विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शराब दुकानों पर चल रहे कथित ओवररेटिंग के खेल पर प्रभावी रोक लग सके।

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