दिल्ली में हादसे, जबलपुर में खामोशी क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है प्रशासन? - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

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Saturday, June 6, 2026

दिल्ली में हादसे, जबलपुर में खामोशी क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है प्रशासन?

 


जबलपुर। दिल्ली में हाल ही में हुए अग्निकांड और व्यावसायिक भवनों में सामने आई सुरक्षा खामियों ने एक बार फिर देशभर के शहरों में संचालित रेस्टोरेंट, कैफे और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे के बाद कई शहरों में प्रशासन सक्रिय हुआ, लेकिन जबलपुर में आज भी ऐसे अनेक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं जहां सुरक्षा मानकों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।

आनंद टाकीज के सामने रसल चौक के रेस्टोरेंटों पर उठ रहे सवाल

शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र रसल चौक में संचालित कई रेस्टोरेंट पहली और दूसरी मंजिल पर चल रहे हैं। इनमें से अधिकांश स्थानों पर ग्राहकों के लिए केवल एक ही प्रवेश और निकास मार्ग दिखाई देता है। यदि किसी कारणवश आग लग जाए या कोई अन्य आपात स्थिति निर्मित हो जाए तो लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना बड़ी चुनौती बन सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या कम नहीं है और यदि निष्पक्ष जांच हो तो कई गंभीर खामियां सामने आ सकती हैं।

नामचीन रेस्टोरेंट की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में

रसल चौक आनंद टाकीज के सामने स्थित शहर के एक चर्चित और नामचीन रेस्टोरेंट की संरचना भी चर्चा का विषय बनी हुई है। रेस्टोरेंट तक पहुंचने के लिए सामने की ओर एक संकरी लोहे की सीढ़ी बनाई गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊपरी हिस्से में ही रसोईघर संचालित होता है, जहां गैस सिलेंडर और अन्य ज्वलनशील सामग्री का उपयोग होता है। यही नहीं जहां शाम के समय इतनी भीड़ रहती है, लोग वेटिंग में खड़े रहते हैं परिवार सहित सहित, दुर्भाग्यवश कोई हादसा हो जाए तो वहां मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता यही संकरी सीढ़ी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी स्थिति में भगदड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

वीआईपी आते हैं, लेकिन सुरक्षा पर नहीं जाती नजर

विडंबना यह है कि इन प्रतिष्ठानों में शहर के कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कारोबारी और प्रभावशाली लोग अपने परिवार के साथ पहुंचते हैं। इसके बावजूद वर्षों से संचालित इन भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर शायद ही कभी सार्वजनिक रूप से चर्चा हुई हो। सवाल यह है कि क्या संबंधित विभागों ने इन प्रतिष्ठानों का नियमित सुरक्षा निरीक्षण किया है? क्या अग्निशमन विभाग के मानकों का पालन हो रहा है? और यदि हो रहा है तो फिर कई स्थानों पर वैकल्पिक निकास मार्ग क्यों दिखाई नहीं देते?

कागजों में सुरक्षा, जमीन पर क्या हकीकत?

नियमों के अनुसार किसी भी भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक प्रतिष्ठान में अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग, पर्याप्त चौड़ाई वाली सीढ़ियां और आपदा प्रबंधन की व्यवस्था होना आवश्यक माना जाता है। लेकिन शहर के कई रेस्टोरेंटों को देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ये सभी व्यवस्थाएं वास्तव में मौजूद हैं या केवल दस्तावेजों तक सीमित हैं। यदि प्रशासन व्यापक जांच अभियान चलाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

सभी रेस्टोरेंट एक जैसे नहीं

यह कहना भी उचित नहीं होगा कि शहर के सभी रेस्टोरेंट सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर रहे हैं। रसल चौक क्षेत्र में ही कुछ ऐसे प्रतिष्ठान मौजूद हैं जहां दो से तीन निकास मार्ग हैं, खुला वातावरण है और सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। ऐसे प्रतिष्ठान यह साबित करते हैं कि व्यवसाय और सुरक्षा दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। लेकिन चिंता उन स्थानों को लेकर है जहां चारों ओर बंद संरचना और एकमात्र निकास मार्ग किसी भी समय खतरे का कारण बन सकते हैं।

दिल्ली से सबक लेने की जरूरत

दिल्ली के हादसों ने यह साबित कर दिया है कि दुर्घटनाएं चेतावनी देकर नहीं आतीं। एक छोटी सी चूक सैकड़ों लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। ऐसे में जबलपुर प्रशासन को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहने के बजाय शहर के सभी रेस्टोरेंट, कैफे और रूफटॉप भोजनालयों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए। साथ ही यह जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए कि कितने प्रतिष्ठानों के पास वैध अग्नि सुरक्षा अनुमति है और कितने प्रतिष्ठान नियमों के विपरीत संचालित हो रहे हैं।

जनता की भी है जिम्मेदारी

सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। आम नागरिकों को भी यह देखना चाहिए कि जिस स्थान पर वे अपने परिवार के साथ जा रहे हैं वहां आपात स्थिति में बाहर निकलने की पर्याप्त व्यवस्था है या नहीं। चमक-दमक और लोकप्रियता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण सुरक्षा होती है, क्योंकि दुर्घटना की स्थिति में यही व्यवस्था जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है।

बड़ा सवाल

क्या जबलपुर में भी किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही प्रशासन जागेगा, या फिर दिल्ली की घटनाओं से सबक लेते हुए समय रहते शहर के रेस्टोरेंटों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? यह सवाल आज हर उस नागरिक के मन में है जो अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित है।

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