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Saturday, June 6, 2026

प्रथम टुडे की खबर का असर: फायर सेफ्टी पर नगर निगम का बड़ा एक्शन, 72 घंटे में मांगी ऑडिट रिपोर्ट

लगातार खबरों के बाद प्रशासन हरकत में, शहर के होटल, अस्पताल, स्कूल, मॉल और व्यावसायिक भवन जांच के दायरे में



जबलपुर। शहर में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी और संभावित हादसों के खतरे को लेकर प्रथम टुडे द्वारा पिछले कई दिनों से लगातार प्रकाशित की जा रही खबरों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। होटल, अस्पताल, स्कूल, कोचिंग संस्थान, मैरिज गार्डन, मॉल और अन्य व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर उठाए गए सवालों के बाद नगर निगम प्रशासन सक्रिय हुआ है। नगर निगम ने व्यापक जांच अभियान शुरू करते हुए संबंधित संस्थानों से 72 घंटे के भीतर फायर सेफ्टी ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।

प्रथम टुडे लगातार उठा रहा था सुरक्षा का मुद्दा

प्रथम टुडे ने हाल के दिनों में प्रकाशित अपनी विशेष रिपोर्टों में शहर के कई ऐसे भवनों और प्रतिष्ठानों की स्थिति उजागर की थी, जहां बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन आते-जाते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्थाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई स्थानों पर फायर सिलेंडर तो मौजूद हैं, लेकिन अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण या तो बंद पड़े हैं या उनका नियमित परीक्षण नहीं किया जा रहा। इन खबरों में यह सवाल भी उठाया गया था कि यदि किसी बहुमंजिला भवन, होटल, स्कूल या अस्पताल में आगजनी जैसी घटना हो जाए तो लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी।

स्कूलों और शिक्षण संस्थानों की भी होगी जांच

नगर निगम के अभियान में केवल होटल और व्यावसायिक प्रतिष्ठान ही नहीं बल्कि स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान भी शामिल किए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि बड़ी संख्या में बच्चे और विद्यार्थी इन परिसरों में प्रतिदिन मौजूद रहते हैं, इसलिए यहां सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि भवनों में फायर अलार्म सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, अग्निशामक यंत्र, विद्युत सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की तैयारियां पर्याप्त हैं या नहीं।

केवल अग्निशामक यंत्र लगाने से नहीं चलेगा काम

नगर निगम ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल फायर सिलेंडर या अग्निशामक यंत्र लगाना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर हाइड्रेंट लाइन, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म, इमरजेंसी लाइटिंग और सुरक्षित निकासी मार्ग जैसी व्यवस्थाओं का पूरी तरह चालू और कार्यशील होना आवश्यक होगा। जांच दल मौके पर पहुंचकर सभी उपकरणों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण करेगा।

बहुमंजिला इमारतें विशेष निगरानी में

शहर की बहुमंजिला इमारतों, बड़े होटलों, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले व्यावसायिक परिसरों को विशेष निगरानी में रखा गया है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी इमारतों में किसी भी प्रकार की तकनीकी या सुरक्षा संबंधी कमी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए कागजी औपचारिकताओं के बजाय जमीनी स्तर पर सुरक्षा इंतजामों की जांच की जाएगी।

कर्मचारियों को भी दी जाएगी प्रशिक्षण व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार प्रशासन केवल उपकरणों की जांच तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित संस्थानों के कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया जाएगा। कई बार हादसों के दौरान उपकरण मौजूद होने के बावजूद कर्मचारियों को उनका उपयोग नहीं आता, जिससे नुकसान बढ़ जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए नियमित फायर ड्रिल और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी बल दिया जा रहा है।

सवाल अभी भी बाकी

नगर निगम की कार्रवाई के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि जिन संस्थानों को वर्षों पहले संचालन की अनुमति दी गई, वहां सुरक्षा मानकों की समय-समय पर समीक्षा क्यों नहीं हुई। यदि किसी भवन में सुरक्षा व्यवस्थाएं अधूरी थीं तो संबंधित विभागों द्वारा इसकी निगरानी क्यों नहीं की गई। ऐसे कई प्रश्न हैं जिनके उत्तर आने वाले दिनों में जांच के दौरान सामने आ सकते हैं।

नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि

प्रशासन का कहना है कि इस पूरे अभियान का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं बल्कि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे को रोकना है। प्रथम टुडे द्वारा लगातार उठाए गए जनहित के मुद्दे के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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