जबलपुर। नर्मदा तट स्थित जमतरा घाट क्षेत्र में रेलवे पुल के नीचे अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का एक नया तरीका सामने आने की चर्चा है। स्थानीय सूत्रों और ग्रामीणों के अनुसार सुबह लगभग 6 बजे से 11 बजे के बीच कई कश्तियों के माध्यम से नदी से रेत निकाली जाती है और बाद में उसे मोटरसाइकिलों के जरिए निर्धारित स्थानों तक पहुंचाया जाता है।
कश्तियों से निकासी, मोटरसाइकिलों से परिवहन
बताया जा रहा है कि पहले नदी से कश्तियों के माध्यम से रेत निकालकर घाट के किनारे एकत्र की जाती है। इसके बाद बोरी में भरकर मोटरसाइकिलों पर लादकर खेतों और एकांत स्थानों पर स्टॉक किया जाता है। सूत्रों का दावा है कि एक मोटरसाइकिल पर 8 से 10 बोरियां तक लादकर परिवहन किया जाता है और बाद में इसी रेत को बाजार में बेचा जाता है।
रोजंनदारी पर लगाए गए युवक
ग्रामीणों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में आसपास के गांवों के युवकों का उपयोग किया जा रहा है। बताया जाता है कि मोटरसाइकिल से रेत ढोने वाले युवकों को प्रति ट्रिप लगभग 250 रुपये तक दिए जाते हैं। प्रतिदिन कई चक्कर लगाकर बड़ी मात्रा में रेत एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जाती है।
कई घाटों पर फैला होने का दावा
सूत्रों का कहना है कि यह केवल जमतरा घाट तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि आसपास के अन्य घाटों पर भी इसी प्रकार का नेटवर्क सक्रिय है। अवैध उत्खनन करने वाले समूह नदी से रेत निकालने, परिवहन करने और स्टॉक करने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी तय करते हैं, जिससे कार्रवाई होने की स्थिति में मुख्य संचालकों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
वर्षों से जारी होने का आरोप
नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में यह गतिविधि कोई नई नहीं है। उनका आरोप है कि कई वर्षों से अवैध रेत निकासी का काम विभिन्न तरीकों से जारी है। ग्रामीणों का दावा है कि इस कारोबार में प्रभावशाली और बाहुबली प्रवृत्ति के लोगों की भी भूमिका है, जिसके कारण खुलकर शिकायत करने से लोग बचते हैं।
प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि इतनी बड़ी संख्या में कश्तियों और मोटरसाइकिलों के माध्यम से होने वाली गतिविधियों की जानकारी प्रशासन और पुलिस तक नहीं पहुंचना संभव नहीं लगता। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार जारी गतिविधियों ने निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
कार्रवाई होगी या फिर चलेगा खेल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रेलवे पुल के नीचे और खुले क्षेत्र में प्रतिदिन अवैध रेत निकासी की जा रही है तो संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या खनिज विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से इस पूरे नेटवर्क की जांच करेंगे, या फिर अवैध रेत का यह कारोबार इसी तरह चलता रहेगा?

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