जबलपुर की पत्रकारिता जगत ने एक सशक्त, निर्भीक और सिद्धांतवादी व्यक्तित्व को खो दिया। परम श्रद्धेय मोहन शशि जी अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके निधन से पत्रकारिता जगत में गहरा शोक व्याप्त है। मोहन शशि जी केवल एक पत्रकार नहीं थे, बल्कि पत्रकारिता के उस दौर के प्रतिनिधि थे, जब खबरें ईमानदारी से लिखी जाती थीं और शब्दों की विश्वसनीयता ही पत्रकार की पहचान होती थी।
नवभारत में सिटी चीफ के रूप में कार्य करते हुए मोहन शशि जी ने पत्रकारिता के उच्च मानकों को स्थापित किया। वह दौर ऐसा था जब चार लाइन की खबर भी मेहनत और जिम्मेदारी के साथ तैयार की जाती थी। समाचार के साथ विचार भी होते थे और पत्रकारिता का उद्देश्य केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को दिशा देना होता था। शशि जी ने हमेशा निष्पक्षता, सादगी और बेबाकी को अपनी पहचान बनाया।
मोहन शशि जी का व्यक्तित्व बेहद सरल और मिलनसार था। वे युवा पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे और अपनी बात को स्पष्ट व बेबाक अंदाज में रखने में कभी हिचकिचाते नहीं थे। उनकी लेखनी में ईमानदारी और सोच में स्पष्टता झलकती थी। उन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम माना।
आज जब पत्रकारिता बदलते दौर से गुजर रही है, ऐसे में मोहन शशि जी जैसे सिद्धांतवादी पत्रकारों की कमी और भी ज्यादा महसूस होती है। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और पत्रकारिता के मूल्यों के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
प्रथम टुडे परिवार श्रद्धेय मोहन शशि जी के चरणों में शत-शत नमन करता है। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके परिवारजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
विनम्र श्रद्धांजलि…
सादर नमन… 🙏

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