1997 से चेक पीरियड तय करने पर कोर्ट की हैरानी, डीजी और विधिक सलाहकार से मांगा जवाब
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच प्रक्रिया पर तीखी नाराजगी जताते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामला छतरपुर निवासी कृष्ण प्रताप सिंह चंदेल से जुड़ा है, जिन्हें आय से अधिक संपत्ति के मामले में आरोपी बनाया गया था।
कोर्ट ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि जांच एजेंसी ने जिस अवधि को ‘चेक पीरियड’ माना है, उस दौरान याचिकाकर्ता महज एक वर्ष का था। न्यायालय ने इसे तर्कहीन और गैर-व्यावहारिक बताते हुए एजेंसी को फटकार लगाई है।
चेक पीरियड पर उठे सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि EOW ने वर्ष 1997 से 2021 तक की अवधि को जांच का आधार बनाया। जबकि याचिकाकर्ता का जन्म वर्ष 1996 में हुआ था। इस आधार पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि एक वर्ष की उम्र में किसी व्यक्ति की आय या संपत्ति का आकलन किस आधार पर किया जा सकता है।
इसके अलावा यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता को सरकारी सेवा वर्ष 2023 में प्राप्त हुई। ऐसे में न्यायालय ने पूछा कि जब संबंधित व्यक्ति उस अवधि में शासकीय सेवा में था ही नहीं, तो उस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई कैसे की जा सकती है।
भाई के मामले में परिवार भी जांच के घेरे में
जानकारी के अनुसार, यह मामला याचिकाकर्ता के भाई के खिलाफ दर्ज एक प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें उन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान एजेंसी ने दायरा बढ़ाते हुए परिवार के अन्य सदस्यों को भी इसमें शामिल कर लिया।
इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर याचिकाकर्ता को उसकी सरकारी नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया। याचिका में तर्क दिया गया कि संबंधित अवधि में वह नाबालिग था और किसी पद पर भी नहीं था, इसलिए उसके खिलाफ की गई कार्रवाई कानून सम्मत नहीं है।
हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
मामले को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने EOW के महानिदेशक और विधिक सलाहकार को नोटिस जारी कर सात दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच की वैधानिकता साबित नहीं होती है, तो पूरी कार्रवाई निरस्त की जा सकती है।

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