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Saturday, January 31, 2026

वरिष्ठ अधिवक्ता ज्योति राय के सोशल मीडिया बयान से उठा विवाद, पुलिस व मीडिया की भूमिका पर सवाल


 प्रथम टुडे 

जबलपुर।विजय नगर थाना क्षेत्र से जुड़ा चर्चित मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जिला अधिवक्ता संघ की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीमती ज्योति राय ने इस प्रकरण को लेकर सोशल मीडिया पर एक विस्तृत बयान जारी किया है, जिसमें उन्होंने पुलिस प्रशासन और कुछ मीडिया संस्थानों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

यह बयान उस मामले से जुड़ा है, जिसमें कुछ दिन पहले एक युवती द्वारा खनन कारोबारी विनोद श्रीवास्तव के पुत्र शुभम श्रीवास्तव पर दुष्कर्म के आरोप लगाए गए थे। बाद में युवती द्वारा बयान बदलते हुए इसे मानसिक दबाव में दर्ज कराई गई रिपोर्ट बताया गया था।

 पहले क्या हुआ था?

विजय नगर थाना क्षेत्र में दर्ज इस मामले ने शहर में काफी हलचल मचाई थी। हालांकि, अगले ही दिन युवती ने अपने बयान में कहा था कि उसने मानसिक दबाव में आकर शिकायत दर्ज कराई थी और उसके साथ कोई आपराधिक घटना नहीं हुई। इसके बाद पुलिस ने जांच की दिशा में बदलाव किया और मामला शांत होता नजर आया।

 



सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप

अब वरिष्ठ अधिवक्ता ज्योति राय ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि संबंधित युवती को

लगातार तीन दिनों तक विजय नगर थाने में बैठाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने अपने बयान में कहा है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी स्थिति दर्ज होने की संभावना है, इसके बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया।

फ्लैट में दबाव बनाने के आरोप

अपने सोशल मीडिया बयान में ज्योति राय ने आरोप लगाया है कि परवहा बिजन बिल्डिंग स्थित एक फ्लैट में

उनके पुत्र शुभम श्रीवास्तव

उनका ड्राइवर

उनकी पत्नी और बेटी

द्वारा बार-बार पहुंचकर युवती पर जबरदस्ती साथ ले जाने का दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि युवती को पिस्टल दिखाकर डराने जैसी गंभीर बातों की जानकारी सामने आई थी।

112 कॉल और कार्रवाई पर सवाल

ज्योति राय ने अपने बयान में यह भी कहा कि

112 नंबर पर सूचना दिए जाने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई

मौके की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस द्वारा सख्त कदम नहीं उठाए गए

 नर्मदा जयंती का उल्लेख

उन्होंने बताया कि नर्मदा जयंती के दिन युवती डरी और असहाय अवस्था में थी, जिसे मानवीय दृष्टिकोण से उन्होंने अपनी शरण में लिया और सुरक्षित रूप से थाने तक पहुंचाया।

अपने सोशल मीडिया बयान में उन्होंने लिखा कि

लड़की गरीब हो सकती है, लेकिन वह किसी की भी बेटी हो सकती है। ऐसे मामलों में संवेदनशीलता सबसे जरूरी है।”

 मीडिया की भूमिका पर टिप्पणी

वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कुछ मीडिया संस्थानों पर तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करने और जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के आरोप भी लगाए हैं। उन्होंने जिम्मेदार पत्रकारिता की आवश्यकता पर जोर दिया है।

 अब भी कई सवाल

सोशल मीडिया पर आए इस बयान के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं—

क्या युवती पर बयान बदलने का दबाव था?

थाने में तीन दिन बैठाने के दावे की सच्चाई क्या है?

112 कॉल और कथित हथियार दिखाने के आरोपों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

 पुलिस पक्ष का इंतजार

फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से ज्योति राय के सोशल मीडिया बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का पक्ष आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

प्रथम टुडे मामले से जुड़े सभी पक्षों पर नजर बनाए हुए है।

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