24 जनवरी को उमाघाट–ग्वारीघाट में आस्था और अध्यात्म का भव्य संगम
प्रथम टुडे
जबलपुर।नर्मदा तट पर आस्था और भक्ति का महासागर एक बार फिर उमड़ने जा रहा है। नर्मदा प्रकोत्सव एवं नर्मदा जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर इस वर्ष भी 1100 फीट लंबी चुनरी से माँ नर्मदा का दिव्य श्रृंगार किया जाएगा। यह आयोजन मां नर्मदा उमाशंकर चुनरी भक्त समिति द्वारा लगातार 23वें वर्ष आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम 24 जनवरी 2026, दिन शनिवार, प्रातः से उमाघाट परिसर में शुरू होगा, जहाँ भक्तों और श्रद्धालुओं का विशाल संगम देखने को मिलेगा।
अनुष्ठानों से सजेगा दिव्यता का अद्भुत माहौल
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल श्री गणेश पूजन से होगी। इसके बाद वर्षभर में केवल एक बार दर्शन हेतु निकाली जाने वाली मां नर्मदा की पावन चरण पादुका का विधिवत पूजन और अर्चन किया जाएगा।
इसके साथ ही विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों की श्रृंखला पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता से भर देगी—
नर्मदे–नर्मदेश्वर भोलेनाथ का रुद्राभिषेक
गौ दुग्ध से मां रेवा का अभिषेक
सहस्त्र पुष्पों से अर्चन
गायत्री मंत्रों के साथ 365 बाती का दीप अर्पण
इन सभी अनुष्ठानों से ग्वारीघाट–उमाघाट क्षेत्र अभूतपूर्व आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित होगा।
विशेष आकर्षण: माँ की नावका द्वारा वैष्णव भोग अर्पण
इस वर्ष भी पारंपरिक रूप से माइया की नावका द्वारा वैष्णव भोग अर्पण का वैदिक अनुष्ठान श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति से सराबोर करेगा।
इसके पश्चात ग्यारह सौ फीट लंबी चुनरी अर्पण का दृश्य नर्मदा तट पर एक मनोहारी आध्यात्मिक महोत्सव का रूप ले लेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय क्षण बनेगा।
आयोजन समिति की अपील
मां नर्मदा उमाशंकर चुनरी भक्त समिति एवं आयोजन के निवेदक नर्मदा पुत्र जयकिशन गुप्ता ने जन–जन से अनुरोध किया है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पुण्य अवसर का लाभ लें और माँ नर्मदा की कृपा प्राप्त करें।
आयोजन में प्रमुख रूप से उपस्थित रहेंगे
डॉ. सुधीर अग्रवाल, एड. जयकिशन गुप्ता, अमर सिंह ठाकुर, डॉ. सुचित्रा मिश्रा, राकेश अहिरवार, सोनू सैनी, प्रमोद नागर, सुरेंद्र खरे, राजेश साहू, समीर पटेल, नीतीश पटेल, अतुल विश्वकर्मा, अंकुर श्रीवास्तव, मोनू सोनकर, आशीष वाजपेई, गोलूपुरी गोस्वामी, कमल विश्वकर्मा, मनोज कुशवाहा एवं कान्यकुब्ज वैश्य महिला मंडल की बहनें
नर्मदा तट की संस्कृति को नए शिखर पर ले जाने वाला आयोजन
यह आयोजन नर्मदा तट की प्राचीन संस्कृति, परंपरा और आस्था को एक नए आयाम पर स्थापित करते हुए ऐतिहासिक स्वरूप ले रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बनेंगे।

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