जबलपुर बरेला के पास निसर्ग वॉटर पार्क हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा और नियमों के पालन को लेकर सख्ती के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर में रहवासी क्षेत्रों के बीच संचालित हो रहे दर्जनों होटल आज भी नियम-कायदों को चुनौती देते हुए बेखौफ चल रहे हैं। हादसे के बाद प्रशासनिक जांच महज 12 होटलों तक सीमित रह गई, जबकि शहर के कई इलाकों में होटल संचालन, भवन अनुमति, अग्नि सुरक्षा, पार्किंग और लाइसेंस व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हैं। यादव कॉलोनी स्थित होटल सुकून सहित कई प्रतिष्ठान अब जांच के दायरे में आने की मांग के बीच हैं। ऐसे में सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तव में कार्रवाई करना चाहता है या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
निसर्ग वॉटर पार्क हादसे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन?शहर में हुए निसर्ग पार्क हादसे के बाद प्रशासन ने कुछ होटलों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर औपचारिक जांच और निरीक्षण की कार्रवाई जरूर की, लेकिन अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित थी। शहर के कई रहवासी क्षेत्रों में संचालित हो रहे होटल आज भी नियम-कायदों को धता बताते हुए बेखौफ चल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अमला कुछ दिनों तक सक्रिय दिखाई देता है, फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि कहीं प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही फिर से जागने का इंतजार तो नहीं कर रहा।
एक होटल नहीं, शहर में कई स्थानों पर संचालित हो रहे होटल
चर्चाओं के केंद्र में आए विवेक त्रिपाठी के होटल कारोबार को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार केवल एक होटल ही नहीं, बल्कि शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में उनसे जुड़े कई होटल संचालित होने की बात कही जा रही है। आरोप हैं कि कुछ होटलों में एसी और नॉन-एसी कमरों की व्यवस्था के साथ कमरों को किराए पर उपलब्ध कराया जाता है, वहीं कुछ स्थानों पर घंटों के हिसाब से भी कमरे दिए जाने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर होती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही संभव है।
एक लाइसेंस पर कई होटल संचालित होने के आरोप
सूत्रों का दावा है कि विवेक त्रिपाठी से जुड़े होटल कारोबार की जांच की जाए तो यह सामने आ सकता है कि एक ही लाइसेंस अथवा उससे जुड़े प्रावधानों के तहत शहर में कई होटल संचालित हो रहे हैं। यादव कॉलोनी और पीएनटी कॉलोनी क्षेत्र में संचालित होटलों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि संबंधित विभाग निष्पक्ष जांच करे तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
पांच मंजिला होटल को अनुमति कैसे मिली?
यादव कॉलोनी स्थित होटल को लेकर सबसे बड़ा सवाल भवन अनुमति को लेकर उठ रहा है। क्षेत्रीय नागरिकों के अनुसार होटल के सामने और आसपास की सड़कों की चौड़ाई सीमित है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के अनुसार भवन निर्माण और मंजिलों की अनुमति देते समय सड़क की चौड़ाई सहित अन्य तकनीकी बिंदुओं का परीक्षण किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि संकरी सड़क वाले क्षेत्र में पांच मंजिला भवन की अनुमति किन आधारों पर प्रदान की गई। यदि सभी नियमों का पालन हुआ है तो संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए, और यदि नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की चर्चाएं भी फिर चर्चा में
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ वर्ष पूर्व पीएनटी कॉलोनी क्षेत्र में संचालित एक होटल की शिकायत मिलने पर पुलिस अधिकारियों द्वारा पूछताछ की गई थी। सूत्रों के अनुसार होटल प्रबंधन और पुलिस अधिकारियों के बीच विवाद की स्थिति बनी थी, जिसके बाद संबंधित अधिकारियों को लाइन अटैच किए जाने की चर्चा लंबे समय तक शहर में होती रही। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि संबंधित अभिलेखों और प्रशासनिक रिकॉर्ड से ही हो सकती है, लेकिन यह मामला आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
विजयनगर से ग्वारीघाट तक कई होटलों पर सवाल
केवल यादव कॉलोनी या पीएनटी कॉलोनी ही नहीं, बल्कि विजयनगर, गढ़ा, ग्वारीघाट रोड, इंद्रपुरी कॉलोनी सहित कई रहवासी क्षेत्रों में संचालित हो रहे होटलों को लेकर भी स्थानीय नागरिक लगातार सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि इन क्षेत्रों में पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे यातायात प्रभावित होता है। साथ ही कई स्थानों पर सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
युवक-युवतियों की आवाजाही से क्षेत्रीय नागरिक परेशान
रहवासी क्षेत्रों में संचालित हो रहे कुछ होटलों को लेकर स्थानीय नागरिकों का कहना है कि दिन-रात होने वाली आवाजाही से सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। क्षेत्रीय रहवासियों के अनुसार कई बार छोटे बच्चों और परिवारों के सामने असहज परिस्थितियां निर्मित होती हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि किसी क्षेत्र का उपयोग आवासीय उद्देश्य के लिए निर्धारित है तो वहां व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति और निगरानी भी नियमों के अनुरूप होना चाहिए।
न सुरक्षा व्यवस्था, न अग्निशमन इंतजाम
कई होटलों में अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास मार्ग, पार्किंग व्यवस्था और अन्य अनिवार्य सुरक्षा उपायों की स्थिति क्या है, यह भी जांच का विषय है। यदि किसी भवन में आग या अन्य आपदा की स्थिति निर्मित होती है तो वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी, इस पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम, फायर विभाग और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से व्यापक जांच अभियान चलाना चाहिए।
क्या होगी व्यापक जांच या फिर अगले हादसे का इंतजार?
शहर में रहवासी क्षेत्रों में संचालित हो रहे होटलों, भवन अनुमतियों, लाइसेंस व्यवस्था, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। एस्केप वॉटर पार्क हादसे के बाद शुरू हुई कार्रवाई यदि केवल औपचारिकता बनकर रह गई है तो यह चिंता का विषय है। अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला प्रशासन, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, फायर विभाग और पुलिस संयुक्त रूप से व्यापक जांच करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शहर में संचालित होटल वास्तव में नियमों के अनुरूप हैं या नहीं। अन्यथा जनता के बीच यही संदेश जाएगा कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है और प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही सक्रिय होता है।

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