नेताओं और पंचायत प्रशासन की साठगांठ से गांव बना नरक: सरपंच, सचिव, सहायक सचिव और पूर्व मंडल अध्यक्ष के खिलाफ फूटा जनता का हल्लाबोल
बरगी/जबलपुर:बरगी विधानसभा के अंतर्गत आने वाले पावला ग्राम में आज उस समय तख्तापलट जैसी स्थिति निर्मित हो गई, जब क्षेत्र के औचक निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार की टीम को ग्रामीणों के भारी विरोध और तीखे आक्रोश का सामना करना पड़ा। गांव में बुनियादी सुविधाओं के अभाव और लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार से त्रस्त ग्रामीणों ने तीनों आला अधिकारियों को मौके पर ही बंधक जैसी स्थिति में घेर लिया।
इस घटना का एक सनसनीखेज वीडियो भी सामने आया है, जिसमें आक्रोशित ग्रामीणों की भारी भीड़ कलेक्टर की सरकारी गाड़ी को चारों तरफ से घेरे हुए है और जमकर नारेबाजी कर रही है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे प्रशासनिक अमला जनता के तीखे सवालों के आगे बेबस नजर आ रहा है।
भ्रष्टाचार के 'चार स्तंभों' पर सीधे आरोप, जांच की मांग
घेराव के दौरान ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। जनता ने कलेक्टर के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि:
- सरपंच कमलेश पटेल
- सचिव दिकू लाल झारिया
- सहायक सचिव रेवाराम साहू
- पूर्व मंडल अध्यक्ष उमंग गुमास्ता
इन चारों की आपसी साठगांठ और 'सिंडिकेट' के कारण गांव में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियां और भ्रष्टाचार किया गया है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना था कि इन सभी की मिलीभगत से सरकारी योजनाओं का पैसा जमीन पर लगाने के बजाय अपनी जेबों में और कागजों पर ही ठिकाने लगा दिया गया। ग्रामीणों ने इन सभी के खिलाफ सख्त और उच्च स्तरीय वित्तीय जांच कराने के साथ-साथ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई और जेल भेजने की मांग की है।
वीडियो ने खोली विकास के दावों की पोल: कागजों पर बनी 'सड़क' जमीन से गायब!
"वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गांव में सड़क नाम की कोई चीज ही नहीं है। जिस जगह को 'रास्ता' कहा जा रहा है, वहां सिर्फ घुटनों तक कीचड़ और दलदल का साम्राज्य है। वीडियो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि जो सड़कें कागजों पर चमचमा रही थीं और जिनका पैसा डकार लिया गया, उनकी जमीनी हकीकत शून्य है। इसी बदहाली को देखकर ग्रामीणों का गुस्सा भड़का और उन्होंने कलेक्टर की गाड़ी को घेर लिया।"
"वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गांव में सड़क नाम की कोई चीज ही नहीं है। जिस जगह को 'रास्ता' कहा जा रहा है, वहां सिर्फ घुटनों तक कीचड़ और दलदल का साम्राज्य है। वीडियो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि जो सड़कें कागजों पर चमचमा रही थीं और जिनका पैसा डकार लिया गया, उनकी जमीनी हकीकत शून्य है। इसी बदहाली को देखकर ग्रामीणों का गुस्सा भड़का और उन्होंने कलेक्टर की गाड़ी को घेर लिया।"
भीषण गर्मी में सड़कों पर फैला कीचड़, अफसरों की गाड़ियां भी हुईं लथपथ
गांव की जमीनी हकीकत देखकर खुद प्रशासनिक अमला भी हैरान रह गया। जिस मौसम में धूल उड़नी चाहिए, उस भीषण गर्मी में भी गांव की सड़कों पर कीचड़ और नालियों का गंदा पानी फैला हुआ है। आलम यह था कि विरोध का सामना करने पहुंचीं कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार की चमचमाती गाड़ियां भी गांव के कीचड़ में लथपथ हो गईं। विकास के दावों की पोल खोलती यह तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं और वीडियो में ग्रामीणों का यह रौद्र रूप देखकर अब जिला प्रशासन बैकफुट पर है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्टाचारियों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन उग्र रूप लेगा।

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