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Wednesday, May 20, 2026

हिस्ट्रीशीटर अब्दुल रज्जाक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज, हाई कोर्ट ने दिए अहम निर्देश

 जबलपुर में कभी दहशत का पर्याय रहे हिस्ट्रीशीटर अब्दुल रज्जाक को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत को वैध माना, वहीं राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को भी अहम निर्देश जारी किए हैं


न्यायिक हिरासत को बताया वैध

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने हिस्ट्रीशीटर और अनेक आपराधिक मामलों के आरोपी अब्दुल रज्जाक की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आरसीएस पति बिसेन की खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में रज्जाक की हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता, क्योंकि वह विभिन्न आपराधिक मामलों में न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद है।

राज्य सरकार और पुलिस को कोर्ट के निर्देश

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। अदालत ने कहा कि अब्दुल रज्जाक और उसके परिवार के खिलाफ दर्ज सभी लंबित मामलों की विस्तृत सूची उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में यदि रज्जाक या उसके परिजनों के खिलाफ कोई नया मामला दर्ज किया जाता है, तो उसकी सूचना 24 घंटे के भीतर उनके परिवार को दी जाए।

राजनीतिक द्वेष का लगाया आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद अली तथा अधिवक्ता शारिक अकील फारूकी ने अदालत में पक्ष रखते हुए दावा किया कि अब्दुल रज्जाक को राजनीतिक द्वेष के चलते झूठे मामलों में फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि रज्जाक पर तीन बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की गई, लेकिन सलाहकार बोर्ड द्वारा उन मामलों को मंजूरी नहीं दी गई।

सरकार ने कहा — वैध मामलों में जेल में बंद

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत में दलील दी कि रज्जाक विभिन्न आपराधिक मामलों में वैधानिक रूप से जेल में बंद है और उसकी गिरफ्तारी व हिरासत पूरी तरह कानून सम्मत है। इसी आधार पर सरकार ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को निराधार बताते हुए खारिज किए जाने की मांग की।

जमानत के लिए कानूनी विकल्प खुले

खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि यदि याचिकाकर्ता को राहत चाहिए तो वह नियमित कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित अदालत में जमानत आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका ऐसे मामलों में स्वीकार नहीं की जा सकती, जहां आरोपी न्यायालय के आदेश से न्यायिक हिरासत में हो।

लंबे समय से चर्चाओं में रहा नाम

अब्दुल रज्जाक का नाम लंबे समय से जबलपुर के आपराधिक मामलों और पुलिस रिकॉर्ड में चर्चाओं का विषय रहा है। शहर में कई गंभीर मामलों में उसका नाम सामने आता रहा है। हाल के वर्षों में उसके खिलाफ चली कानूनी कार्रवाइयों और लगातार न्यायिक प्रक्रिया के चलते एक बार फिर उसका मामला सुर्खियों में है।

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