जबलपुर। संस्कारधानी की शांत सड़कें अब रात ढलते ही खौफ के हाईवे में तब्दील होने लगी हैं। रात के 9 बजते ही शहर के कई प्रमुख रास्तों पर बेलगाम और हुड़दंगी बाइकर्स का आतंक शुरू हो जाता है। बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों पर तीन-तीन, चार-चार सवार होकर ये हुड़दंगी ऐसी रफ्तार भरते हैं कि सड़क पर चल रहे आम राहगीरों की सांसें अटक जाती हैं।
उप-नगरीय सड़कों और फ्लाईओवर पर 'मौत का खेल'
इन स्टंटबाजों का सबसे ज्यादा आतंक उन सड़कों पर देखने को मिल रहा है जो मुख्य शहर को उप-नगरीय क्षेत्रों से जोड़ती हैं। नवनिर्मित फ्लाईओवर के ऊपर और नीचे की सड़कों को इन लड़कों ने जैसे अपना रेसिंग ट्रैक बना लिया है। रोंगटे खड़े कर देने वाली रफ्तार से जब ये बाइकर्स आम जनता के बाजू से सरकते हैं, तो बुजुर्ग और महिलाएं घबराहट के मारे संतुलन खो बैठते हैं। कई बार तो ये मासूम राहगीरों को टक्कर मारकर पलक झपकते ही फरार हो चुके हैं।
लड़कियों को पीछे बिठाकर नाबालिग दे रहे 'रफ्तार को चैलेंज'
हैरानी की बात तो यह है कि इस जानलेवा रफ्तार के खेल में अब नाबालिग भी पीछे नहीं हैं। उम्र से पहले हाथ में आई महंगी और तेज रफ्तार गाड़ियों के दम पर ये नाबालिग कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। कई मौकों पर इन हुड़दंगियों के पीछे युवतियां और महिलाएं भी बैठी दिखाई देती हैं, जो बिना किसी सुरक्षा (हेलमेट) के इस खतरनाक स्टंटबाजी का हिस्सा बन रही हैं। रफ्तार का ये नशा कई बार इन पर खुद भी भारी पड़ता है, जब संतुलन बिगड़ने से ये बीच सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त होकर लहूलुहान हो जाते हैं।
बुलेट से 'गोली' जैसी आवाज: पटाखे फोड़कर फैला रहे दहशत
पुलिस ने कुछ समय पहले मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ सख्त मुहिम चलाई थी, लेकिन ऐसा लगता है कि अब इन उपद्रवियों के दिल से पुलिस का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। शहर की शांत रातों में बुलेट मोटरसाइकिल के मॉडिफाइड साइलेंसर से 'पटाखे' फोड़ना और 'मिसिंग' करना अब आम हो चुका है। जब ये अचानक धमाका करते हुए निकलते हैं, तो राहगीरों और आसपास के दुकानदारों में दहशत फैल जाती है कि कहीं गोली तो नहीं चल गई।
पुलिस की मजबूरी या ढुलमुल रवैया? कंट्रोल रूम के तीसरी आंख से कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है। जनता का साफ कहना है कि जब पूरे शहर में करोड़ों रुपये की लागत से स्मार्ट सिटी के तहत सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, तो कंट्रोल रूम की 'तीसरी आंख' से इन बाइकर्स की पहचान कर इनके घरों पर सीधे वारंट और गाड़ी जब्ती की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही?
"रोकें तो गिर जाते हैं, फिर पुलिस पर आता है दोष" — डीएसपी संतोष शुक्ला
इस गंभीर मुद्दे पर जब डीएसपी संतोष शुक्ला (मालवीय चौक) से बात की गई, तो उन्होंने जमीनी हकीकत और पुलिस की मजबूरी को स्वीकार किया। उन्होंने बताया:
"ये बाइकर्स अक्सर उन जगहों पर सबसे ज्यादा तेजी दिखाते हैं जहाँ पुलिस चेकिंग पॉइंट लगे होते हैं। अगर इन्हें मौके पर जबरन रोकने की कोशिश की जाए, तो ये और तेज भागते हैं जिससे इनके गिरने और घायल होने का खतरा रहता है। ऐसे हादसों के बाद उल्टा जनता और परिजन पुलिस को ही दोषी ठहराने लगते हैं कि चेकिंग के चक्कर में बाइक सवार को गिराकर घायल कर दिया।"
अब पुलिस बदलेगी रणनीति: डीएसपी संतोष शुक्ला ने साफ किया है कि भले ही मौके पर पकड़ने में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें हैं, लेकिन इन हुड़दंगियों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। अब पुलिस अपने खास प्लान और नए तरीके से इन पर शिकंजा कसेगी ताकि शहर की सड़कों को फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।

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