सीसीटीवी जांच में खुला सच, झाड़ियों में ही छिपी मिली मादा तेंदुआ — हालत में सुधार, प्रशासन ने अफवाहों से बचने की अपील की
जबलपुर। शहर में उस वक्त सनसनी फैल गई जब यह खबर तेजी से वायरल होने लगी कि इलाज के लिए लाई गई एक मादा तेंदुआ अस्पताल परिसर से भाग निकली है। सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में इस खबर ने लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया।
हालांकि, कुछ ही घंटों में इस पूरे मामले की सच्चाई सामने आ गई और यह खबर महज एक अफवाह साबित हुई।
नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय की प्रभारी संचालक डॉ. शोभा जावरे ने स्पष्ट किया कि तेंदुआ कहीं भागा नहीं था, बल्कि अस्पताल परिसर में ही सुरक्षित मौजूद था।
उन्होंने बताया कि करीब 5-6 दिन पहले नरसिंहपुर वन प्रभाग से एक घायल मादा तेंदुआ को इलाज के लिए जबलपुर लाया गया था। जांच में सामने आया कि वह ‘केनाइन डिस्टेंपर’ नामक खतरनाक वायरल बीमारी से संक्रमित है, जो वन्य जीवों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
तेंदुए की सुरक्षा और बेहतर उपचार के लिए उसे पहले पिंजरे (केज) से निकालकर छोटे और फिर बड़े बाड़े (क्रॉल) में रखा गया था, ताकि उसे अपेक्षाकृत प्राकृतिक माहौल मिल सके और वह खुद को चोट न पहुंचाए।
इसी दौरान सुबह जब स्टाफ को तेंदुआ अपने निर्धारित स्थान पर नजर नहीं आया तो अस्पताल में हड़कंप मच गया। तत्काल सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और एहतियातन वन विभाग की रेस्क्यू टीम को भी अलर्ट किया गया।
लेकिन जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी को राहत दी।
तेंदुआ कहीं गया ही नहीं था, बल्कि बड़े बाड़े में मौजूद झाड़ियों के पीछे छिपकर बैठा हुआ था।
इसके बाद वन विभाग और अस्पताल टीम ने संयुक्त रूप से उसे सुरक्षित तरीके से वापस केज में शिफ्ट कर दिया।
डॉ. जावरे के मुताबिक,
मादा तेंदुए की उम्र करीब 8 से 10 साल है
वह केनाइन डिस्टेंपर (वायरल संक्रमण) से पीड़ित है
इलाज के बाद उसकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है

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