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Monday, April 6, 2026

जो सबमें रमे और सबको खुद में रमाए, वही हैं श्रीराम : रामभद्राचार्य

अवधपुरी गौरीघाट में 1419वीं रामकथा का शुभारंभ, राम जन्म के ‘जगत मंगल’ स्वरूप की व्याख्या


जबलपुर। पद्म विभूषण, रामानंदाचार्य जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म केवल विप्र, धेनु, देव और संतों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे जगत के कल्याण हेतु हुआ है।

उन्होंने श्रीरामचरित मानस की चौपाई “राम जनमु जग मंगल हेतु” का संदर्भ देते हुए कहा कि श्रीराम का अवतरण समस्त सृष्टि के मंगल के लिए हुआ है।

अवधपुरी, गौरीघाट स्थित आयुर्वेद कॉलेज मैदान में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के मंगलाचरण में उन्होंने यह उद्बोधन दिया।

राम जन्म का उद्देश्य : समस्त सृष्टि का कल्याण

महाराजश्री ने कहा कि जब रावण के अत्याचारों से संसार में अमंगल बढ़ गया था, तब भगवान श्रीराम का जन्म हुआ।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान ‘चिदानंदमय’ हैं, उनमें कोई विकार नहीं होता। वे भक्तों की इच्छा से प्रकट होते हैं और समस्त जीवों के कल्याण हेतु अवतरित होते हैं।

नर्मदा की निर्मलता और राम की सुंदरता

मां नर्मदा की महिमा का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि नर्मदा ‘निर्मलता’ की प्रतीक हैं और जगत की वासनाओं का नाश करती हैं।

उन्होंने भावपूर्ण ढंग से कहा कि श्रीराम की सुंदरता ऐसी है कि स्वयं नर्मदा भी उनसे मोहित हो जाती हैं।

राम को समझने के आठ सिद्धांत

राम के तत्व को समझाने के लिए महाराजश्री ने आठ सिद्धांत बताए—

व्याकरण, उपमान, कोष, आप्तवाक्य, व्यवहार, वाक्य शेष, विवृत्ति और सानिध्य।

उन्होंने कहा कि “राम” शब्द स्वयं सिद्ध है—

‘रा’ का अर्थ देना

‘म’ का अर्थ मंगल

अर्थात जो सदा सबको मंगल प्रदान करें, वही राम हैं।

संस्कृत के बिना मानस का सही अर्थ संभव नहीं

महाराजश्री ने कहा कि श्रीरामचरित मानस को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि चित्रकूट में वे “संस्कृत संस्कृति गुरुकुलम” की स्थापना कर रहे हैं, जिसका शुभारंभ 14 जनवरी को होगा।

समरसता का अद्भुत दृश्य, 41 समाज बने यजमान

इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही सामाजिक समरसता—

पहली बार किसी धार्मिक आयोजन में 41 समाजों के प्रतिनिधि यजमान बने।

मुख्य यजमान के रूप में डॉ. राजेश धीरावाणी सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

मंच पर संतों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति

कथा में अनेक संतों का सानिध्य रहा, जिनमें प्रमुख रूप से राघवदेवाचार्य, सुखानंद द्वाराचार्य सहित अन्य संत शामिल रहे।

मंच पर राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, विधायक सुशील तिवारी (इंदु), अभिलाष पांडे, नगर निगम अध्यक्ष रिंकू विज सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पूजन किया।

नर्मदा कलश यात्रा ने रचा इतिहास

कथा से पूर्व निकली ‘नर्मदा कलश यात्रा’ ने भव्यता का नया कीर्तिमान स्थापित किया।

15 से अधिक झांकियां

संकीर्तन और बैंड-बाजे

हजारों महिलाओं ने सिर पर कलश लेकर भाग लिया

यात्रा में भगवान राम दरबार, शबरी प्रसंग, निषाद प्रसंग की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।

नवधा भक्ति की प्रस्तुति ने भाव-विभोर किया

नाट्य लोक संस्था द्वारा प्रस्तुत ‘भक्तिमती शबरी’ नाटिका में श्रीराम द्वारा नवधा भक्ति का वर्णन किया गया।

इस प्रस्तुति ने समरसता और भक्ति का गहरा संदेश दिया।

विशिष्ट अतिथियों ने लिया आशीर्वाद

लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कथा स्थल पहुंचकर आशीर्वाद लिया

संजीव सचदेवा (एमपी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस) सपरिवार पहुंचे

महाराजश्री ने उनके दांपत्य जीवन के उदाहरण को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

प्रभु प्रेमियों की उमड़ी भीड़, आयोजन की सराहना

कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

महाराजश्री ने आयोजन समिति और समरसता सेवा संगठन की सराहना करते हुए इसे समाज में एकता का उत्कृष्ट प्रयास बताया।

प्रतिदिन कथा का समय

आयोजन समिति ने शहरवासियों से अपील की है कि वे प्रतिदिन

सायं 4:30 बजे से 7:30 बजे तक

कथा में पहुंचकर श्रवण लाभ लें।

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