पाटन विधानसभा क्षेत्र से विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. अजय विश्नोई ने शहर में आयोजित पुस्तक मेले में सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य से पुस्तक मेले की शुरुआत की गई थी, वह अब कमजोर पड़ता नजर आ रहा है।
कैसे शुरू हुआ था पुस्तक मेले का मॉडल
विधायक ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2024 में तत्कालीन कलेक्टर दीपक सक्सेना ने शहर में पुस्तक और स्टेशनरी बाजार में फैली अनियमितताओं को खत्म करने के लिए इस मॉडल की शुरुआत की थी।
उस समय यह सामने आया था कि शहर के कुछ नामचीन पुस्तक विक्रेताओं ने मिलकर किताबों की सप्लाई पर एक तरह की मोनोपॉली बना रखी थी।
स्थिति यह थी कि कई निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित किताबें केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध होती थीं।
स्कूल–विक्रेता गठजोड़ और कमीशन का खुलासा
विधायक के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि इस व्यवस्था के पीछे स्कूलों और पुस्तक विक्रेताओं के बीच गठजोड़ काम कर रहा था।
आरोप था कि किताबों की बिक्री के एवज में स्कूलों को लंबा कमीशन दिया जाता था, जिसका सीधा बोझ अभिभावकों पर पड़ता था।
शहीद स्मारक में लगा मेला, टूटी थी मोनोपोली
इस समस्या के समाधान के लिए शहीद स्मारक में पुस्तक मेले का आयोजन किया गया था।
इस मेले की खास बात यह थी कि यहां अलग-अलग स्टालों पर विभिन्न प्रकाशकों की किताबें उपलब्ध कराई गईं, जिससे एक ही जगह पर विकल्प मिलने लगे और बाजार में बनी मोनोपोली को तोड़ने में सफलता मिली।
अब फिर पुराने हालात लौटने के संकेत
डॉ. विश्नोई ने आरोप लगाया कि वर्तमान में उसी पुस्तक मेले में अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक निगरानी में कमी के चलते फिर से वही पुराने हालात बनने लगे हैं, जहां अभिभावकों को सीमित विकल्प और महंगे दामों का सामना करना पड़ रहा है।
मूल उद्देश्य से भटक रही व्यवस्था’
पूर्व मंत्री ने गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो पुस्तक मेले का मूल उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पहले की तरह पारदर्शिता और सख्ती के साथ व्यवस्था को लागू किया जाए, ताकि अभिभावकों को वास्तविक राहत मिल सके।

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