प्रथम टुडे
जबलपुर। मध्य-पूर्व में जारी तनाव, विशेष रूप से ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बिगड़ते हालात का असर अब जबलपुर के स्थानीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। शहर में रसोई गैस की किल्लत ने न केवल आम रसोई को प्रभावित किया है, बल्कि छोटे व्यापारियों के सामने भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।
सुबह के नाश्ते और चाट-चटोनी के ठेलों पर महंगाई का असर पहले ही दिख रहा था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ते हुए बेकरी आइटम तक पहुंच गया है।
सुबह के नाश्ते से चाय तक सब महंगा
जहां पहले समोसा और आलू बंडा 10 रुपए में मिल जाता था, अब वही 15 से 20 रुपए तक बिक रहा है। पोहा, जो 10–15 रुपए प्लेट था, अब 20–25 रुपए तक पहुंच गया है।
चाय की कीमत भी दोगुनी हो चुकी है—₹5 की चाय अब ₹10–₹15 में और ₹15 की स्पेशल चाय ₹30 में मिल रही है।
अब बेकरी आइटम पर भी असर
हैरानी की बात यह है कि बेकरी आइटम, जो मुख्य रूप से भट्टी (ओवन) में तैयार होते हैं, वे भी महंगे हो गए हैं। स्थानीय बेकरी संचालकों का कहना है कि भले ही उत्पाद भट्टी में बनते हैं, लेकिन कच्चे माल की तैयारी, क्रीम, फिलिंग, चाशनी, और अन्य प्रक्रियाओं में गैस का उपयोग होता है। इसके अलावा परिवहन लागत और अन्य खर्च बढ़ने से ब्रेड, बिस्किट, बन, केक जैसे लोकल बेकरी आइटम की कीमतों में भी इजाफा हो गया है।
ब्लैक में गैस, बढ़ती लागत
कमर्शियल सिलेंडर की कमी के चलते व्यापारियों को ब्लैक में गैस खरीदनी पड़ रही है, जिसमें ₹1000 से ₹2000 तक अतिरिक्त खर्च हो रहा है। इसका सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर पड़ रहा है।
ग्राहक बनाम दुकानदार: बढ़ रही खींचतान
कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कई जगह ग्राहकों और दुकानदारों के बीच बहस की स्थिति बन रही है। ग्राहक महंगाई से नाराज हैं, वहीं दुकानदार इसे मजबूरी बता रहे हैं।
छोटे कारोबार पर संकट, कई ठेले बंद
गैस संकट ने छोटे ठेलेदारों की कमर तोड़ दी है। कई लोगों ने अपना काम सीमित कर दिया है—अब वे केवल सुबह या शाम तक ही ठेला लगा रहे हैं, जबकि कुछ ने तो फिलहाल अपना व्यवसाय बंद ही कर दिया है।
होटलें बंद होने की अफवाह
शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि गैस की किल्लत के चलते होटल बंद हो सकते हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से ऐसी किसी भी स्थिति की पुष्टि नहीं की गई है और इसे फिलहाल अफवाह माना जा रहा है।
आगे की राह
यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तो आने वाले दिनों में महंगाई और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब और छोटे व्यापारियों के रोजगार पर पड़ेगा।

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