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Monday, June 15, 2026

रसूख के आगे बेबस प्रशासन? शहर के बीचों-बीच संचालित रेस्टोरेंट और होटल पर उठे सवाल

जबलपुर/ शहर में अवैध निर्माणों और सुरक्षा मानकों को लेकर प्रशासन की कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी हुई है। ऐसे में आनंद टॉकीज रोड स्थित चर्चित रेस्टोरेंट तथा कॉलोनी क्षेत्र में संचालित बहुमंजिला होटल को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था, भवन मानकों और अनुमतियों को लेकर गंभीर प्रश्न मौजूद होने के बावजूद संबंधित विभाग अब तक स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आ रहे हैं। ऐसे में इन प्रतिष्ठानों को मिली स्वीकृतियों, अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं और निर्माण मानकों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

लगातार उठ रहे सवाल, लेकिन कार्रवाई का इंतजार

जबलपुर में अवैध निर्माणों, होटलों और रेस्टोरेंट्स के खिलाफ प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं। हालांकि शहर में एक ऐसा नामचीन रेस्टोरेंट और होटल समूह भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिस पर वर्षों से गंभीर सवाल उठने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रशासन छोटे प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई कर अपनी उपलब्धियां गिना रहा है, जबकि प्रभावशाली लोगों से जुड़े बड़े प्रतिष्ठानों की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

आनंद टॉकीज रोड स्थित रेस्टोरेंट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

आनंद टॉकीज रोड स्थित एक चर्चित रेस्टोरेंट को लेकर सुरक्षा संबंधी गंभीर प्रश्न खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि रेस्टोरेंट में आने-जाने के लिए पर्याप्त और सुरक्षित निकास व्यवस्था नहीं है। बताया जा रहा है कि ऊपरी हिस्से तक पहुंचने और वहां से निकलने के लिए केवल एक संकरी लोहे की सीढ़ी का उपयोग किया जा रहा है, जिससे एक समय में केवल एक व्यक्ति ही आ-जा सकता है। ऐसे में किसी आपातकालीन स्थिति या अग्निकांड की स्थिति में ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।

कॉलोनी के बीच संचालित होटल, नियमों के पालन पर संदेह

शहर की एक कॉलोनी के भीतर संचालित होटल को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आवासीय क्षेत्र में संचालित इस होटल की इमारत पांच मंजिला है, जबकि आसपास की सड़कें अपेक्षाकृत संकरी हैं। होटल के सामने लगभग आठ फीट चौड़ी सड़क तथा आसपास 10 से 15 फीट चौड़े मार्ग बताए जा रहे हैं। ऐसे में आपदा या अग्निकांड जैसी स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर आशंकाएं जताई जा रही हैं।

भवन अनुमति और नक्शा स्वीकृति की जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि संबंधित होटल को पांच मंजिला निर्माण की वैधानिक अनुमति प्राप्त हुई है तो इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मांग की जा रही है कि नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा अन्य संबंधित विभाग सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करें कि भवन का नक्शा किस आधार पर स्वीकृत किया गया और निर्माण सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप है या नहीं।

पूर्व विवादों के बावजूद जारी कारोबार

होटल समूह के संचालक को लेकर भी चर्चाएं होती रही हैं। बताया जाता है कि पूर्व में उनके एक वाटर पार्क में हुई एक युवक की मौत के मामले में कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उनका व्यवसाय लगातार विस्तार करता रहा। आलोचकों का कहना है कि पूर्व विवादों के बावजूद संबंधित प्रतिष्ठानों की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की गंभीरता से समीक्षा की जानी चाहिए।

रसूख और प्रभाव के आरोप

शहर में यह चर्चा भी है कि होटल समूह के संचालकों का प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर प्रभाव रहा है। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि इसी प्रभाव के चलते विभिन्न अनुमतियां प्राप्त की गईं और व्यवसाय का विस्तार हुआ। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए संबंधित विभागों द्वारा तथ्यों को सार्वजनिक किया जाना आवश्यक माना जा रहा है।

अग्नि सुरक्षा और आपदा प्रबंधन की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े होटल और रेस्टोरेंट प्रतिष्ठानों में अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन निकास, फायर एनओसी तथा अन्य सुरक्षा मानकों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि किसी दुर्घटना की स्थिति बनती है तो वहां मौजूद सैकड़ों लोगों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट और सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।

जानकारी मांगने पर टालमटोल का आरोप

सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों का आरोप है कि जब संबंधित अधिकारियों से इन मामलों में जानकारी मांगी जाती है तो उन्हें सूचना के अधिकार (RTI) का सहारा लेने की सलाह देकर जवाब देने से बचा जाता है। इससे लोगों के मन में और अधिक संदेह उत्पन्न हो रहा है। नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में विभागों को स्वतः जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।

निष्पक्ष जांच की उठी मांग

शहर में अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, अग्निशमन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से इन प्रतिष्ठानों की जांच करें। यदि सभी निर्माण और संचालन नियमों के अनुरूप हैं तो इसकी जानकारी सार्वजनिक की जाए, और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो नियमों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का मानना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए, चाहे प्रतिष्ठान छोटा हो या बड़ा।

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