दीक्षांत समारोह से पहले फूटा छात्रों का गुस्सा, चयन प्रक्रिया पर उठे सवाल; कुलगुरु कार्यालय तक पहुंचा विरोध
जबलपुर/ दीक्षांत समारोह से ठीक पहले विश्वविद्यालय परिसर में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब बड़ी संख्या में स्वर्ण पदकधारी विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। देश के विभिन्न राज्यों से आए 220 से अधिक मेधावी छात्र-छात्राओं का आरोप है कि उन्हें अंतिम समय तक यह विश्वास दिलाया गया कि सभी पदकधारियों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित किया जाएगा, लेकिन रिहर्सल के दौरान अचानक व्यवस्था में बदलाव की जानकारी देकर उनके वर्षों की मेहनत और उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया गया।
रिहर्सल के दौरान बदली तस्वीर, फैसले से बढ़ी नाराजगी
दीक्षांत समारोह की रिहर्सल के दौरान अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि कार्यक्रम की समय-सीमा और सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखते हुए राष्ट्रपति के हाथों केवल सीमित संख्या में विद्यार्थियों को ही मंच पर बुलाया जाएगा। बाकी स्वर्ण पदकधारियों और शोधार्थियों को उपाधि एवं प्रमाण-पत्र अलग प्रक्रिया के तहत दिए जाएंगे। यह जानकारी सामने आते ही सभागार में मौजूद विद्यार्थियों ने कड़ा विरोध जताया और प्रशासन से फैसले पर पुनर्विचार की मांग की।
'जब सभी टॉपर हैं, तो भेदभाव क्यों?'
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों का कहना था कि सभी स्वर्ण पदकधारी अपने-अपने संकाय और विषयों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर यहां तक पहुंचे हैं। ऐसे में कुछ चुनिंदा लोगों को ही राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित करने का निर्णय उचित नहीं है। उनका कहना है कि यदि मंच पर सम्मान सीमित रखना था तो इसकी जानकारी पहले ही दे दी जाती, ताकि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए विद्यार्थियों और उनके परिवारों को अंतिम समय पर निराशा का सामना न करना पड़ता।
चयन प्रक्रिया पर पारदर्शिता की मांग
विद्यार्थियों ने यह भी सवाल उठाया कि मंच पर सम्मानित किए जाने वाले विद्यार्थियों का चयन किन मानकों के आधार पर किया गया। उनका कहना है कि प्रशासन ने इस संबंध में कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश सार्वजनिक नहीं किए हैं। इससे विद्यार्थियों के बीच असमंजस और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। छात्रों ने मांग की कि यदि चयन किया गया है तो उसके सभी मानदंड सार्वजनिक किए जाएं ताकि किसी प्रकार के पक्षपात या मनमानी की आशंका समाप्त हो सके।
कुलगुरु कार्यालय के बाहर प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा
विरोध कर रहे विद्यार्थियों ने परिसर में नारेबाजी करते हुए कुलगुरु कार्यालय का रुख किया। वहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा और कहा कि सभी पात्र स्वर्ण पदकधारियों को राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने का समान अवसर मिलना चाहिए। यदि यह संभव नहीं है तो विश्वविद्यालय प्रशासन चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक करे और विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से बताए कि किन आधारों पर सूची तैयार की गई।
अधिकारियों ने किया समझाने का प्रयास
विरोध बढ़ने की सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और विद्यार्थियों से चर्चा कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने कार्यक्रम की समय-सीमा, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शन कर रहे छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। काफी देर तक बातचीत का दौर चलता रहा।
दीक्षांत समारोह से पहले बढ़ी प्रशासन की चुनौती
राष्ट्रपति की प्रस्तावित उपस्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी कर दी गई है। ऐसे समय में मेधावी विद्यार्थियों के विरोध ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब विश्वविद्यालय प्रबंधन एक ओर कार्यक्रम की गरिमा और प्रोटोकॉल बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नाराज विद्यार्थियों की आपत्तियों का समाधान निकालने के प्रयास भी जारी हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि समारोह से पहले यह विवाद किस तरह सुलझाया जाता है।

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