जबलपुर में शराब सिंडिकेट का साम्राज्य? विरोध करने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई की तैयारी, करोड़ों की ब्लैक मनी का खेल! - Pratham Today, Sach Ki Baat SabKe Saath -->

Breaking

Friday, June 12, 2026

जबलपुर में शराब सिंडिकेट का साम्राज्य? विरोध करने वाले कारोबारियों पर कार्रवाई की तैयारी, करोड़ों की ब्लैक मनी का खेल!

 

जबलपुर। शहर के शराब कारोबार में एक बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि शराब व्यापार का बड़ा हिस्सा कुछ प्रभावशाली लोगों और आबकारी विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से संचालित किया जा रहा है। इस व्यवस्था के कारण करोड़ों रुपये की अवैध कमाई और ब्लैक मनी का खेल चल रहा है, जबकि स्वतंत्र रूप से कारोबार करने वाले ठेकेदारों को लगातार दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

70 प्रतिशत दुकानों पर सिंडिकेट का कब्जा, 30 प्रतिशत कारोबारियों पर दबाव

सूत्रों के अनुसार शहर की करीब 70 प्रतिशत शराब दुकानें एक प्रभावशाली सिंडिकेट के प्रभाव में हैं, जबकि शेष 30 प्रतिशत स्वतंत्र ठेकेदार इस समूह का हिस्सा बनने से इनकार कर रहे हैं। आरोप है कि सिंडिकेट में शामिल नहीं होने वाले कारोबारियों को प्रशासनिक और व्यावसायिक स्तर पर परेशान किया जा रहा है, ताकि वे भी इस कथित नेटवर्क के सामने झुकने को मजबूर हो जाएं।

चिल्ड बियर और लोकप्रिय ब्रांड की सप्लाई रोकने के आरोप

स्वतंत्र कारोबारियों का आरोप है कि उनकी दुकानों पर चिल्ड बियर की सप्लाई प्रभावित की जा रही है। इतना ही नहीं, बाजार में सबसे अधिक मांग वाले ब्रांडों का स्टॉक भी समय पर उपलब्ध नहीं कराया जा रहा। इससे इन दुकानों की बिक्री और प्रतिष्ठा दोनों पर असर पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि यह सब उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर करने की सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है।

चार दुकानों वाले कारोबारी ने खोला मोर्चा

मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब शहर में चार शराब दुकानों का संचालन करने वाले एक बड़े कारोबारी ने कथित सिंडिकेट और अधिकारियों की कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। कारोबारी ने कथित तौर पर अवैध दबाव, सप्लाई में भेदभाव और मनमानी के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। इसके बाद शराब कारोबार से जुड़े हलकों में हलचल तेज हो गई है।

'विरोध की कीमत चुकाने को तैयार रहें' जैसी चर्चाएं

शराब कारोबारियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि विरोध करने वाले कारोबारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का दावा है कि उसकी दुकानों पर लगातार निरीक्षण, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई और अन्य प्रशासनिक दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ओवररेटिंग से करोड़ों की काली कमाई का आरोप

व्यापारियों का आरोप है कि शराब की बोतलों पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलकर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की जा रही है। आरोप है कि इस ओवररेटिंग से निकलने वाला पैसा एक संगठित तंत्र के माध्यम से इकट्ठा किया जाता है, जिससे करोड़ों रुपये की ब्लैक मनी तैयार हो रही है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो जाए तो बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।

एक तरफ छूट, दूसरी तरफ सख्ती?

आरोप यह भी हैं कि सिंडिकेट से जुड़ी दुकानों पर नियमों के पालन को लेकर नरमी बरती जाती है, जबकि स्वतंत्र कारोबारियों की दुकानों पर लगातार जांच और निरीक्षण किए जाते हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस दोहरे रवैये के कारण निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पूरी तरह खत्म हो गई है और स्वतंत्र व्यवसाय चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

भोपाल तक पहुंची शिकायत, निष्पक्ष जांच की मांग

लगातार बढ़ते विवाद के बीच कई व्यापारियों ने राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शराब कारोबार में वाकई कोई सिंडिकेट सक्रिय है या नहीं और यदि है तो उसके संरक्षण में कौन-कौन शामिल हैं।

No comments:

Post a Comment