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Saturday, May 30, 2026

"कॉकरोच जनता पार्टी से लेकर नेताओं की सैलरी तक: धीरेंद्र शास्त्री ने उठाए रोजगार, महंगाई और व्यवस्था से जुड़े सवाल"

 


बद्रीनाथ/बागेश्वर धाम। उत्तराखंड के पवित्र धाम बद्रीनाथ में चल रही कथा के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की राजनीति, युवाओं की स्थिति और आर्थिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। अपने विशिष्ट अंदाज में उन्होंने हाल ही में चर्चा में आई "कॉकरोच जनता पार्टी" को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह केवल एक मजाकिया विषय नहीं है, बल्कि इसके पीछे देश के युवाओं की बढ़ती बेचैनी और रोजगार संबंधी चुनौतियों का संकेत भी छिपा है।

शास्त्री ने कहा कि भारत जैसे देश में, जहां लोग कॉकरोच का नाम सुनकर असहज हो जाते हैं, वहां उसके नाम पर राजनीतिक संगठन या पार्टी का बन जाना अपने आप में एक अनोखी घटना है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि यह स्थिति कहीं न कहीं इस बात की ओर भी इशारा करती है कि युवाओं के सामने रोजगार और कौशल विकास की गंभीर चुनौतियां मौजूद हैं। उनका मानना है कि यदि युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा और पर्याप्त अवसर मिलें तो वे ऐसे प्रतीकात्मक प्रयोगों की बजाय राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।

युवाओं की चिंता सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि देश के विकास की असली ताकत युवा वर्ग है और यदि युवाओं को रोजगार, शिक्षा तथा कौशल विकास के बेहतर अवसर नहीं मिलेंगे तो यह चिंता का विषय होगा। उन्होंने कहा कि सरकारों और समाज दोनों को इस दिशा में गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है, ताकि युवाओं की प्रतिभा का बेहतर उपयोग हो सके।

पेट्रोल-डीजल की खपत पर भी रखी राय

कथा के दौरान उन्होंने पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों और ईंधन की खपत पर भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन की बचत का आह्वान किए जाने से पहले ही उन्होंने स्वयं वाहन उपयोग को काफी सीमित कर दिया था। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वे लिखित में देने को तैयार हैं कि पिछले एक महीने में उन्होंने अपनी गाड़ी में एक लीटर ईंधन तक खर्च नहीं किया।

चार्टर विमानों पर भी उठाए सवाल

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि आम जनता से ईंधन की बचत की अपील की जाती है तो जनप्रतिनिधियों और बड़े नेताओं को भी इस दिशा में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि चार्टर विमानों और अत्यधिक सरकारी खर्चों पर नियंत्रण जैसे कदम भी राष्ट्रीय बचत में योगदान दे सकते हैं।

नेताओं के वेतन पर भी दिया सुझाव

अपने संबोधन में धीरेंद्र शास्त्री ने एक सुझाव यह भी दिया कि यदि देश आर्थिक चुनौतियों से गुजर रहा है तो कुछ समय के लिए जनप्रतिनिधियों के वेतन और विशेष सुविधाओं में कटौती पर भी विचार किया जा सकता है। उनका कहना था कि राष्ट्रहित में त्याग केवल आम नागरिकों से ही नहीं बल्कि नेतृत्व वर्ग से भी अपेक्षित होना चाहिए।

व्यंग्य के बहाने व्यवस्था पर टिप्पणी

राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर दिए गए इन बयानों को कई लोग व्यंग्य के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं की बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई और सरकारी खर्च जैसे मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। उनके वक्तव्य सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं और विभिन्न वर्गों में इन पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

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