जबलपुर/भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले में एक बहुत बड़ा कानूनी उलटफेर सामने आया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (जबलपुर) में हुई सुनवाई के बाद, मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को वापस ले लिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद अब समर्थ सिंह भोपाल की जिला अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने की तैयारी में है। इसके साथ ही, अदालत ने मृतका के शव का दोबारा परीक्षण कराने की अनुमति भी दे दी है।
दिल्ली AIIMS में होगा दूसरा पोस्टमार्टम
ट्विशा शर्मा की मृत्यु से जुड़े रहस्यों को सुलझाने के लिए हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि ट्विशा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाए। निष्पक्षता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए यह चिकित्सीय जांच अब राजधानी दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में की जाएगी। इस आदेश के बाद से ही कानूनी गलियारों और सोशल मीडिया पर सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
पिछले 10 दिनों से सुरक्षित रखा था शव
उल्लेखनीय है कि मृतका का शव पिछले दस दिनों से भोपाल के एम्स अस्पताल में सुरक्षित रखा गया था। ट्विशा के परिजन लगातार इस बात पर अड़े थे कि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट अधूरी है और उसमें कई अहम बिंदुओं को नजरअंदाज किया गया है। इसी असंतोष के चलते परिवार लगातार स्वतंत्र और उच्च स्तरीय मेडिकल बोर्ड से दोबारा जांच कराने की मांग कर रहा था।
जिला अदालत से झटका लगने के बाद हाईकोर्ट से मिली राहत
इससे पहले, पीड़ित परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को लेकर भोपाल की जिला अदालत का रुख किया था, लेकिन वहां से उनकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद परिवार ने हार न मानते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने बेहद ठोस दलीलें पेश कीं, जिसके आधार पर कोर्ट ने दूसरी मेडिकल जांच की आवश्यकता को सही माना।
अदालत में वकीलों के बीच तीखी बहस
सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा की मौत के रहस्य को लेकर दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच जोरदार कानूनी बहस देखने को मिली। जहां एक तरफ पीड़ित परिवार के वकीलों ने न्याय और सच्चाई को सामने लाने के लिए दोबारा जांच को अपरिहार्य बताया, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी वकीलों ने इसे गैर-जरूरी बताते हुए याचिका का विरोध किया। हालांकि, अंततः अदालत ने न्यायहित में फैसला सुनाया।
जांच एजेंसियों पर बढ़ा दबाव, CBI जांच की भी सिफारिश
हाईकोर्ट के इस कड़े रुख के बाद स्थानीय पुलिस और जांच एजेंसियों पर दबाव काफी बढ़ गया है। पहले से ही इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई की सुस्त रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे थे। गौरतलब है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही इस पूरे सुसाइड केस की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की सिफारिश कर दी है, जिससे निष्पक्ष न्याय की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं।
क्या बदल जाएगी केस की पूरी दिशा?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली एम्स की नई पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यदि इस नई फॉरेंसिक जांच में मौत के कारणों को लेकर कोई नया या संदेहास्पद तथ्य सामने आता है, तो आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे में नई आपराधिक धाराएं जोड़ी जा सकती हैं। फिलहाल, सभी की निगाहें दिल्ली एम्स से आने वाली मेडिकल रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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