प्रथम टुडे जबलपुर।
बारिश की पहली ही फुहार के साथ प्रथम टुडे ने शहर के जर्जर भवनों को लेकर चेतावनी दी थी कि किस तरह ये खस्ताहाल इमारतें हर साल जान-माल के खतरे को न्यौता देती हैं। "शहर की मुख्य सड़कों पर जर्जर भवन बरसात के मौके पर बने खतरा" शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया गया था कि किस तरह नगर निगम केवल ‘नोटिस थमाओ’ तक सीमित रह गया है, जबकि जर्जर भवनों पर कोई निगरानी नहीं होती कि उनके मालिकों ने सुधार कार्य किया या नहीं।
इस रिपोर्ट में प्रथम टुडे ने स्पष्ट सवाल उठाया था कि जब हादसे के बाद ही प्रशासन चेतता है, तो क्या जान जाने के बाद ही कार्रवाई तय है?
इस खबर के प्रकाशन के कुछ ही दिन बाद नगर निगम ने हरकत में आते हुए मंगलवार को शहर के कई हिस्सों में एक साथ कार्रवाई की। अतिक्रमण और जर्जर भवनों को हटाने का अभियान चलाया गया, जिसमें यातायात में बाधा बन रहे निर्माणों को भी हटाया गया।
कहां-कहां की गई कार्रवाई:
गढ़ा बाजार में 5 दुकानों के अवैध स्ट्रक्चर हटाए गए,
कछपुरा फ्लाईओवर के पास 3 ठेले जब्त किए गए,
एक जर्जर भवन को पूरी तरह ढहा दिया गया,
कलचुरी होटल के पास अवैध अस्थायी अतिक्रमण हटाए गए,
दशमेश द्वार पर ठेले और टपरों को हटाते हुए मुनादी कराई गई कि दोबारा अतिक्रमण करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई का नेतृत्व अतिक्रमण अधिकारी मनीष तड़से और अन्य नगर निगम अधिकारियों ने किया। मौके पर अखिलेश सिंह भदौरिया, बृजकिशोर तिवारी, अंकित पारस, जय प्रवीण, पी. रामा राव, नदीम खान, दुर्गा राव और अभिषेक समुद्रे उपस्थित रहे।
प्रथम टुडे की रिपोर्ट से बदली प्रशासन की रफ्तार
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि जब तक मीडिया में यह विषय नहीं उठा था, तब तक न तो किसी इमारत को चिन्हित किया गया था, न कोई कार्रवाई होती दिख रही थी। प्रथम टुडे की रिपोर्ट के बाद निगम की सक्रियता बढ़ी है।
प्रथम टुडे ने न केवल समस्या को उठाया, बल्कि यह भी बताया कि महज नोटिस थमाना समाधान नहीं है — जरूरी है निगरानी, निरीक्षण और निष्क्रिय भवनों की सूची पर सार्वजनिक कार्यवाही।

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