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Friday, May 15, 2026

भोजशाला मामला: इंदौर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 'वाग्देवी मंदिर' के रूप में मिली मान्यता

 


प्रथम टुडे /धार 

मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर इंदौर हाई कोर्ट ने एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि धार की भोजशाला मूल रूप से मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है। इस फैसले के साथ ही हिंदू पक्ष को यहां पूजा-अर्चना करने का कानूनी अधिकार प्रदान कर दिया गया है, जिसने दशकों पुराने इस कानूनी और धार्मिक विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।

ASI की सर्वे रिपोर्ट बनी जीत का मुख्य आधार

​इस पूरे मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट सबसे निर्णायक साबित हुई। कोर्ट ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि एएसआई के वैज्ञानिक सर्वे, प्राचीन शिलालेखों, और वहां की विशिष्ट स्थापत्य शैली से यह स्पष्ट होता है कि यह संरचना एक मंदिर के रूप में निर्मित की गई थी। खुदाई और जांच के दौरान मिले पुरातात्विक साक्ष्यों ने मंदिर होने के दावों को मजबूती प्रदान की।

मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक भूमि का निर्देश

​अदालत ने केवल मंदिर के पक्ष में ही निर्णय नहीं दिया, बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रशासन को महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। फैसले में कहा गया है कि प्रशासन मुस्लिम पक्ष के लिए अलग से भूमि उपलब्ध कराने पर गंभीरता से विचार करे, ताकि वे अपनी धार्मिक गतिविधियों का निर्वहन कर सकें। यह कदम विवाद के स्थायी समाधान की दिशा में एक संतुलित प्रयास माना जा रहा है।

लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा लाने की पहल

​हाई कोर्ट के फैसले में एक और भावुक और महत्वपूर्ण पहलू 'मां वाग्देवी' की मूल प्रतिमा की घर वापसी का है। वर्तमान में यह दुर्लभ प्रतिमा विदेश (लंदन संग्रहालय) में रखी हुई है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे कूटनीतिक और कानूनी रास्तों का उपयोग कर इस प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए ठोस प्रयास करें, ताकि उसे पुनः उसके मूल स्थान पर स्थापित किया जा सके।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, चप्पे-चप्पे पर फोर्स

​फैसले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए धार जिले सहित पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गई है। धार में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और खुफिया एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। जिला प्रशासन ने नागरिकों से शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भड़काऊ पोस्ट या अफवाहों को रोकने के लिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

आस्था बनाम कानूनी संघर्ष का लंबा सफर

​उल्लेखनीय है कि भोजशाला विवाद दशकों से चला आ रहा था। हिंदू पक्ष इसे राजा भोज द्वारा निर्मित सरस्वती मंदिर और 'ज्ञान का केंद्र' मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद के रूप में देखता रहा है। साल 2003 के बाद से यहां मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज की व्यवस्था लागू थी, जो अब इस ऐतिहासिक फैसले के बाद पूरी तरह से बदल सकती है।

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