जबलपुर। ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या इस बार आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायी होने जा रही है। इस वर्ष शनि जन्मोत्सव के साथ शनिश्चरी अमावस्या और अखंड सौभाग्य का प्रतीक वट सावित्री व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं। हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, शनिवार के दिन अमावस्या का होना इसे 'शनिश्चरी अमावस्या' बनाता है, जो साल में बहुत कम बार होता है। इस त्रि-शक्ति संगम को लेकर श्रद्धालुओं और धर्मप्रेमियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।
राजयोगों का महासंयोग और प्रशासनिक मुस्तैदी
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस दिन केवल तिथियों का ही मेल नहीं है, बल्कि आकाश मंडल में बुधादित्य योग और केदार योग का भी निर्माण हो रहा है। भरणी और कृतिका नक्षत्र के इस विशेष प्रभाव के कारण धार्मिक विद्वान इसे कष्टों से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ अवसर मान रहे हैं। अमावस्या पर नर्मदा स्नान के महत्व को देखते हुए घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन द्वारा विशेष रूप से धूप और गर्मी को देखते हुए सुबह व शाम की भीड़ के लिए मैनेजमेंट प्लान तैयार किया गया है, ताकि श्रद्धालुओं को सुगमता रहे।
तिलवारा शनिधाम में 56 भोग और महाभिषेक
तिलवारा स्थित प्राचीन शनि मंदिर में इस पावन पर्व पर दो दिवसीय अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत 15 मई से श्री रामचरित मानस पाठ के साथ होगी। मुख्य उत्सव 16 मई को होगा, जिसमें शाम 6 बजे भगवान शनिदेव का विशेष महाभिषेक किया जाएगा। इस दौरान मथुरा-वृंदावन से आए कारीगरों द्वारा विशेष रूप से तैयार 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, भव्य श्रृंगार और दिव्य आरती के बाद पूरे दिन भंडारे का सिलसिला चलेगा। क्षेत्र के अनेक विद्वान पंडितों और गणमान्य नागरिकों ने श्रद्धालुओं से इस महोत्सव में शामिल होने की अपील की है।
सदर में गूँजेगा शनिदेव का जयकारा
वहीं दूसरी ओर, श्री शनि समर्थ सेवा समिति सदर द्वारा भी व्यापक तैयारियां की गई हैं। समिति की बैठक में निर्णय लिया गया कि 15 मई को सदर क्षेत्र की मुख्य गलियों से भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके अगले दिन यानी 16 मई को मंदिर परिसर में हवन-पूजन और अभिषेक संपन्न होगा। महोत्सव के समापन पर 17 मई को रामलीला ग्राउंड में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों भक्तों के शामिल होने का अनुमान है।
कष्ट निवारण का अचूक अवसर
धार्मिक मान्यता है कि शनि जयंती और शनिश्चरी अमावस्या के इस दुर्लभ संयोग में पूजन करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैया के जातकों को विशेष राहत मिलती है। पवित्र नदियों में डुबकी लगाकर दान-पुण्य करने से न केवल मानसिक शांति प्राप्त होती है, बल्कि जीवन के रुके हुए कार्यों में भी गति आती है। यही कारण है कि इस बार घर-घर और मंदिरों में शनिदेव के प्रकटोत्सव की तैयारियां बड़े स्तर पर की जा रही हैं।

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