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Tuesday, May 12, 2026

जस्टिस बंसल की 'साइकिल क्रांति': प्रोटोकॉल का मोह त्याग ईधन बचाने की मुहिम में उतरे हाईकोर्ट जज

 

पीएम मोदी के 'मिशन LiFE' और ईंधन बचत के आह्वान को जस्टिस डी.डी. बंसल ने बनाया जीवन का हिस्सा; संस्कारधानी में सादगी की चर्चा



जबलपुर | 

जब नीली बत्ती और सुरक्षा घेरे की जगह एक माननीय न्यायाधीश के हाथों में साइकिल का हैंडल दिखा, तो न्यायधानी जबलपुर की सड़कों पर हर कोई ठिठक गया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जस्टिस डी.डी. बंसल ने अपनी सरकारी सुख-सुविधाओं को दरकिनार कर साइकिल से अदालत पहुंचकर न केवल सादगी की मिसाल पेश की, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वैश्विक विजन को भी मजबूती दी है, जो ईंधन बचाने और धरती को सुरक्षित रखने के लिए दिया गया है।

ईंधन की बचत: देश की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए 'बूस्टर'

​प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मंचों से अपील की है कि भारत को तेल आयात पर निर्भरता कम करनी होगी। जस्टिस बंसल का यह कदम सीधे तौर पर ईंधन संरक्षण (Fuel Conservation) के उस राष्ट्रीय संकल्प से जुड़ा है, जहाँ एक-एक बूंद तेल बचाने का अर्थ देश की आर्थिक शक्ति को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज का उच्च वर्ग लग्जरी कारों को छोड़कर साइकिल या सार्वजनिक परिवहन अपनाता है, तो इससे करोड़ों लीटर ईंधन की बचत संभव है।

वैश्विक मंच पर भारत का मान: 'पंचामृत' संकल्प की सिद्धि

​जस्टिस बंसल की यह पहल प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलवायु शिखर सम्मेलन (COP-26) में घोषित 'पंचामृत' रणनीति का धरातल पर क्रियान्वयन है। प्रधानमंत्री ने दुनिया को 'मिशन LiFE' (Lifestyle for Environment) का मंत्र दिया था, जिसका अर्थ है—ऐसी जीवनशैली अपनाना जो पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए।

  • कार्बन फुटप्रिंट में कमी: सरकारी वाहनों के काफिले के बजाय साइकिल चुनकर जस्टिस बंसल ने शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net Zero Emission) के लक्ष्य में योगदान दिया है।
  • वैश्विक संदेश: यह घटना केवल जबलपुर की नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सजगता का प्रमाण बन गई है।

समाचार के मुख्य बिंदु (Highlights):

  • सादगी का उदाहरण: न्यायाधीशों के साथ चलने वाला सुरक्षा प्रोटोकॉल और वाहनों का काफिला स्वेच्छा से छोड़ा।
  • फिट इंडिया मूवमेंट: पर्यावरण के साथ-साथ खुद को फिट रखने के लिए साइकिल को अपनाया।
  • प्रेरणा का स्रोत: उच्च पद पर बैठे व्यक्ति की यह पहल आम नागरिक को निजी वाहनों का उपयोग कम करने के लिए प्रेरित करेगी।


अदालत परिसर में दिखा अलग नजारा

​जैसे ही जस्टिस बंसल साइकिल चलाकर हाईकोर्ट के गेट नंबर-1 से अंदर दाखिल हुए, वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मी और अधिवक्ता हैरान रह गए। आमतौर पर न्यायाधीशों के आने पर साइरन और सतर्कता का माहौल रहता है, लेकिन जस्टिस बंसल शांत भाव से अपनी साइकिल पार्क कर सीधे अपने चैम्बर की ओर बढ़ गए।

सोशल मीडिया पर 'हीरो' बने जस्टिस

​सोशल मीडिया पर जस्टिस बंसल की तस्वीरें वायरल होते ही नेटिजन्स ने उन्हें "पर्यावरण का असली रक्षक" करार दिया है। लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ईंधन बचाने की अपील को जब न्यायपालिका का ऐसा समर्थन मिलता है, तो वह एक जन-आंदोलन का रूप ले लेती है।

"प्रधानमंत्री जी ने हमेशा कहा है कि छोटे-छोटे बदलाव ही बड़ी क्रांति लाते हैं। जस्टिस बंसल ने साइकिल चलाकर यह बता दिया कि पर्यावरण की चिंता केवल फाइलों में नहीं, बल्कि हमारे आचरण में होनी चाहिए।"

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पर्यावरणविद

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